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आंध्र के किसान अफ्रीका की ओर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपने कंप्यूटर इंजीनियरों को विदेशों में भेजने के लिए मशहूर भारत का आंध्र प्रदेश राज्य अब अपने किसानों को निर्यात करने की योजना पर काम कर रहा है. आंध्र प्रदेश सरकार अपने कुछ किसानों को खेतीबाड़ी के लिए पूर्वी अफ्रीका भेजने पर विचार कर रही है. राज्य सरकार के एक वरिष्ठ सलाहकार इसकी संभावनाओं पर कीनिया, उगांडा और तंज़ानिया की सरकारों से बातचीत के लिए पहले ही रवाना हो चुका है. इस योजना के तहत राज्य के किसान पूर्वी अफ्रीका के इन देशों में सहकारी क्षेत्र में खेतीबाड़ी करेंगे और अपनी कमाई भारत में अपने परिवारों को भेज सकेंगे. ग़ौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में कई साल से सूखा पड़ रहा है जिससे बहुत से किसानों ने आत्महत्या भी की हैं. आँकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश में पिछले क़रीब छह साल में क़रीब तीन हज़ार किसान आत्महत्या कर चुके हैं. इसी साल मई में राज्य सरकार ने उन परिवारों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की थी जिन्होंने 1999 के बाद से आत्महत्या कर ली थी. राज्य के कृषि मंत्री एन रघुवीरा रेड्डी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "यह राज्य के उन किसानों के लिए एक अच्छे कारोबार का मौक़ा है जो शुष्क और उष्ण कटिबंधीय इलाक़ों में खेती करने का अच्छा अनुभव है." अगर मेज़बान देश राज़ी हो जाते हैं तो क़रीब 1000 किसान पूर्वी अफ्रीका के देशों में तंबाक़ू, गन्ना, बाजरा और अन्य शुष्क फ़सलें उगाएंगे. विदेशी निवेश पर राज्य सरकार के सलाहकार सीसी रेड्डी का कहना है कि इस योजना के तहत आंध्र प्रदेश को पचास हज़ार से एक लाख एकड़ तक ज़मीन पट्टे पर मिलेगी जिस पर वे खेतीबाड़ी कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि सहकारी समितियाँ किसानों को नौकरी देंगी और खेतीबाड़ी से होने वाली आमदनी से पट्टे की लागत अदा की जाएगी. राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बातचीत अभी शुरुआती स्तर पर है फिलहाल कोई भी किसान नहीं जा रहा है. विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी ने इस प्रस्ताव को वाहियात बताया है. |
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