| 'कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की ज़रुरत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के दो कृषि विशेषज्ञों को लगता है कि देश में कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की बहुत आवश्कता है. पूर्व कृषिमंत्री सोमपाल शास्त्री और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक मंगला राय ने 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत में कृषि क्षेत्र में और अधिक ध्यान दिए जाने की ज़रुरत है. मंगला राय ने कहा कि किसानों को न केवल समर्थन मूल्य मिलना चाहिए बल्कि उनको फसल पर इंसेंटिव भी मिलना चाहिए. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि खाद्यान्न, फल, सब्ज़ी, मछली और अंडे आदि के क्षेत्र में भारत में जो उन्नति हुई है वह इच्छाशक्ति का परिणाम है. दूसरी ओर सोमपाल शास्त्री का कहना था कि पिछले 20 सालों में किसी भी सरकार की इच्छाशक्ति नहीं रही है कि वह कृषि के क्षेत्र में निवेश बढ़ाए.
जापान और इसराइल जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में प्रति हेक्टेयर निवेश उन देशों की तुलना में नगण्य ही है. मंगला राय ने माना कि सिंचाई के क्षेत्र में देश में निवेश कम हुआ है. उन्होंने अनुसंधान की ज़रुरत को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार ने देश के सभी 578 जनपदों में कृषि अनुसंधान केंद्र की स्थापना के आदेश दिए जा चुके हैं. लेकिन मंगला राय की बात काटते हुए सोमपाल शास्त्री ने कहा कि सिंचाई के क्षेत्र में निवेश कम नहीं नगण्य हुआ है. सोमपाल शास्त्री और मंगला राय दोनों ने कहा कि किसानों के लिए बाज़ार उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है. पूर्व मंत्री शास्त्री ने कहा कि प्रदेशों के बीच उत्पादों की आवाजाही को खोल देना चाहिए और किसानों को मौक़ा मिलना चाहिए कि वे अपने उत्पाद के बेहतर मूल्य ले सकें. |
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