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जीएम फ़सलों के ज़रिए 'नई हरित क्राँति'? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है भारत सरकार की नीति है कि वह जीन संशोधित यानि जीएम फ़सलों के पक्ष में है. उनका कहना था कि इस क्षेत्र में इतना शोध चल रहा है कि आने वाले दिनों में एक 'नई हरित क्रांति' देखने को मिलेगी. कपिल सिब्बल ने ये विचार बीबीसी हिंदी सेवा के साथ विशेष बातचीत में व्यक्त किए. कपिल सिब्बल का कहना था कि केवल उनका मंत्रालय ही इस विषय में अंतिम निर्णय नहीं ले रहा बल्कि पर्यावरण और कृषि मंत्रालयों की भी इस विषय में राय ली जाएगी. सिबल का कहना था कि इन सभी मंत्रालयों के विशेषज्ञ ही तय करेंगे की जो तकनीक बनाई जाती है वह किसान के इस्तेमाल के लिए सही है या नहीं. उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसा कोई फ़ैसला नहीं लिया जाएगा जो जनता को स्वीकार न हो. सिबल का कहना था कि सरकारी विभाग बड़े पैमाने पर जीन संशोधित फ़सलों पर शोध कर रहे हैं और इसके लिए भारत पूँजी निवेशकों को न्योता देगा कि वे भी इस क्षेत्र में निवेश करें और इसे बढ़ावा दें. जीन संशोधित फ़सलों को लेकर पूरी दुनिया में विवाद चल रहा है और यूरोपीय संघ के देशों में तो इन पर प्रतिबंध लगा हुआ है. उनका कहना था कि जब सरकार इस विषय में तकनीक पर अंतिम निर्णय ले लेती है तो विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग होगा और भारतीय कंपनियाँ भी जीएम बीज बनाएँगी. |
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