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गुरुवार, 02 फ़रवरी, 2006 को 09:14 GMT तक के समाचार
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भारत में रोज़गार गारंटी योजना लागू
रोज़गार
कुछ राज्यों में पहले इस योजना को छोटे रुप में लागू किया गया था
ग़रीबी दूर करने के लिए भारत सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी रोज़गार योजना को गुरुवार से लागू कर दिया है. फ़िलहाल इसकी शुरुआत कुछ चुनिंदा ग्रामीण इलाक़ों से की गई है.

राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना केंद्र की यूपीए सरकार की सबसे महात्वाकांक्षी योजना है.

गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने आँध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले के बांदलापल्ली गाँव में इसे प्रतीक रूप में शुरु किया.

वैसे यह योजना पहले चरण में देश भर के 200 पिछड़े ज़िलों में लागू हो रही है. सरकार ने कहा है कि इसका विस्तार किया जाएगा और देश के दूसरे ज़िलों में भी लागू किया जाएगा.

इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों को कम से कम एक सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन रोज़गार उपलब्ध कराया जाएगा.

अनुमान है कि इस योजना से देश के छह करोड़ ग़रीब परिवारों को रोज़गार उपलब्ध करवाया जा सकेगा.

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी दूर करने के उद्देश्य से लाया गया राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना विधेयक 23 अगस्त, 2005 को लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया था.

योजना

मनमोहन सिंह ने बुधवार को माना था कि ग्रामीण रोज़गार योजना अब तक के उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है.

मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी
यूपीए सरकार की इस योजना पर राजनीतिक दलों के बीच सर्वसम्मति थी

गुरूवार को इस योजना की शुरूआत करते हुए उन्होंने और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने इसे दोहराया. वहाँ केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह और आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी भी मौजूद थे.

यूपीए गठबंधन सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन रोज़गार उपलब्ध करवाया जाएगा.

इसके तहत काम पाने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 60 रुपए की मजदूरी मिलेगी या दैनिक मजदूरी का भुगतान राज्यों में तय न्यूनतम मजदूरी के बराबर होगा.

शुरुआती तौर पर इस योजना के लिए लगभग छह हज़ार करोड़ रुपए की राशि रखी गई है लेकिन केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि इसके लिए राशि की कमी नहीं होने दी जाएगी.

योजना को लागू करने के लिए जिन 200 ज़िलों का चयन किया गया है वहाँ अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी, ज़िले में ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की जनसंख्या और मानव विकास के आंकड़ों आदि का ध्यान रखा गया है.

इसको लागू करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका होगी. रोज़गारी गारंटी विधेयक के प्रावधानों के तहत इस योजना पर ग्राम सभा का नियंत्रण और निगरानी होगी.

प्रधानमंत्री ने इसे लागू करने की घोषणा करते हुए कहा कि इस योजना के लिए आगे राज्य सरकारें विधानसभा में और केंद्र सरकार संसद में वार्षिक रिपोर्ट रखेंगी ताक़ि इस पर निगरानी की एक प्रणाली विकसित हो.

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