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रोज़गार गारंटी विधेयक पारित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी दूर करने के उद्देश्य से लाया गया राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना विधेयक मंगलवार को लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है. केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन - यूपीए सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन रोज़गार उपलब्ध करवाया जाएगा. फिलहाल इस योजना के लिए छह हज़ार करोड़ रुपए की राशि रखी गई है. विधेयक को 18 अगस्त को संसद में पेश किया गया था और इस पर कुल 13 घंटों की बहस हुई जिसमें 70 सांसदों ने हिस्सा लिया. सदन में राजनीतिक दलों ने इस विधेयक का जिस तरह एकमत स्वागत किया, ऐसा कम ही देखने में आता है. इसके बाद विधेयक को बुधवार को राज्यसभा में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है. सरकार वहाँ भी इसे संसद के इसी सत्र में पारित करवाना चाहती है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी और नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में इस विधेयक को पारित किया गया. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा, "हम यह दावा नहीं कर रहे हैं कि इस योजना के लागू होने से ग़रीबी मिट जाएगी और कोई स्वर्ग धरती पर उतर आएगा लेकिन यह ग़रीबी दूर करने की दिशा में एक ठोस क़दम है." विपक्षी सदस्यों के सवालों और शंकाओं का जवाब देते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि जहाँ संभव होगा वहाँ सौ से अधिक दिनों तक रोज़गार उपलब्ध कराया जाएगा.
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में न्यूनतम मज़दूरी 60 रुपए से अधिक है वहाँ मज़दूरी की दर वही लागू की जाएगी. राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी विधेयक के पारित होकर क़ानून बन जाने के बाद शुरू में 200 ज़िलों में लागू किया जाएगा. सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन ज़िलों के चयन का काम योजना आयोग को सौंपा गया है. ज़िलों में अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी, ज़िले की उत्पादकता और इसी तरह के कई बिंदुओं को आधार बनाकर ज़िलों का चयन किया जाएगा. इस क़ानून को लागू करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका होगी. ग्रामीण विकास मंत्री ने स्पष्ट किया है कि विधेयक में संशोधन कर दिया गया है जिसके तहत इस योजना पर ग्राम सभा का नियंत्रण और निगरानी होगी. सरकार ने विपक्ष के इस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया कि इस योजना को दो साल के भीतर पूरे देश में लागू किया जाए. |
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