|
रोज़गार गारंटी विधेयक पर शंकाएँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बहुप्रतीक्षित और बहुप्रचारित रोज़गार गारंटी विधेयक गुरूवार को लोक सभा में पेश हो गया लेकिन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद इसे 'ग़रीबी के ख़िलाफ़ महाजंग' बता रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि अगले सप्ताह तक यह विधेयक संसद में पारित भी हो जाएगा. दिल्ली के सभी अख़बारों ने ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के एक व्यक्ति को साल में 100 दिन रोज़गार की गारंटी देने संबंधी इस विधेयक को प्रमुख स्थान तो दिया है लेकिन लगभग सभी अख़बारों का इस ख़बर को पेश करने का अंदाज़ अलग- अलग है. दैनिक हिंदुस्तान का शीर्षक है-रोज़गार गारंटी की दिशा में बढ़े ऐतिहासिक क़दम. दैनिक जागरण लिखता है कि रोज़गार गारंटी विधेयक पर पार्टियाँ एकजुट लेकिन सफलता पर अभी से शंका. नवभारत टाइम्स की हेंडिग है-ग्रामीणों को कम से कम 100 दिन के रोज़गार की गारंटी. टाइम्स ऑफ़ इंडिया लिखता है कि सोनिया गाँधी ने रोज़गार विधेयक को संसद तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई. इंडियन एक्सप्रेस की हेडिंग है-यूपीए सरकार ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का ट्रंप कार्ड चला. शंका दैनिक जागरण ने इस योजना की निगरानी को लेकर आशंकाएँ जाहिर की हैं. अख़बार लिखता है कि जवाहर रोज़गार योजना, जवाहर ग्राम समृद्धि और सुनिश्चित रोज़गार योजना जैसी कई अहम सरकारी योजनाए अकुशलता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं. सरकार के सहयोगी दलों ने भी निगरानी को लेकर आशंका व्यक्त की है. इसमें वामपंथी दल, राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी शामिल है. लोक सभा में समाजवादी पार्टी के नेता मोहन सिंह ने तो निगरानी के लिए एक संसदीय समिति गठित करने की माँग की थी. दैनिक भास्कर ने शीर्षक लगाया है कि हर साल 100 दिन रोज़गार की गारंटी. दूसरी ओर अख़बार लिखता है कि योजना के क्रियान्वयन पर काँग्रेस नज़र रखेगी. हालाँकि किसी भी दल ने इस विधेयक की आलोचना नहीं की है. भाजपा नेता और संसद की ग्रामीण विकास मंत्रालय की स्थाई समिति के अध्यक्ष कल्याण की आपत्ति को अंग्रेज़ी दैनिक हिंदू और दैनिक जागरण ने छापा है. इसमें कल्याण सिंह ने कहा कि सरकार परिवार में एक व्यक्ति को रोज़गार देकर सिर्फ़ बहलाने का काम कर रही है. उनका तर्क है कि ग्रामीण परिवारों में सदस्यों की बड़ी संख्या होती है और एक व्यक्ति को रोज़गार की गारंटी देना बहलाने जैसा है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||