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मंगलवार, 16 अगस्त, 2005 को 02:25 GMT तक के समाचार
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रोज़गार विधेयक बुधवार को पेश होगा
संसद
संसद में इस पर लंबी बहस की उम्मीद है
भारत में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार बुधवार को अपनी अति महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी विधेयक संसद में पेश करेगी.

इस विधेयक को मंगलवार को पेश होना था लेकिन वामपंथी नेताओं ने इस संबंध में लोक सभा में प्रणव मुखर्जी से बातचीत की.

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सभी राज्यों में इस क़ानून को लागू करने में कुछ दिक्कतें हैं. उन्होंने कहा कि बुधवार को यह विधेयक पेश किया जाएगा.

यूपीए सरकार के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में जिन बातों का प्रमुखता से ज़िक्र किया गया है उनमें से एक है राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून.

राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी बिल अगर पास हो जाता है तो इसे शुरू में 200 ज़िलों में लागू किया जाएगा. इस क़ानून को लागू करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका होगी.

इस योजना के तहत हर व्यक्ति को कम से कम 100 दिन काम देने की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी और अगर सरकार ऐसा करने में नाकाम रहती है तो उसे बेरोज़गारी भत्ता देना होगा.

इस योजना के तहत काम पाने वाले लोगों को एक न्यूनतम वेतन भी मिलेगा. ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने बीबीसी को बताया, "हर राज्यों में न्यूनतम मज़दूरी पहले से ही लागू है, वही न्यूनमत वेतन रोज़गार गारंटी क़ानून में भी लागू रहेगा."

न्यूनतम मज़दूरी

उन्होंने बताया कि एक प्रावधान यह भी रखा गया है कि ज़रूरत पड़ने पर केंद्र सरकार भी न्यूनतम मज़दूरी तय करेगी.

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रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्यों पर कम बोझ डाला गया है

राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी क़ानून को लागू करने और उसका ख़र्च राज्य सरकारों पर डालने को लेकर आपत्तियाँ भी व्यक्त की गई थीं.

ख़ास तौर पर वामपंथी पार्टियों ने ज़ोर देकर कहा था कि इस योजना में आने वाले ख़र्च को केंद्र सरकार को ही उठाना चाहिए अन्यथा राज्य सरकारों की आर्थिक हालत देखते हुए इसे लागू करना मुश्किल होगा.

हालाँकि बुधवार को पेश होने वाले इस विधेयक में इस संशोधन को मान लिया गया है पर अभी भी राज्य सरकारों पर इस योजना पर आने वाले ख़र्च का कुछ बोझ पड़ेगा. लेकिन ये बोझ काफ़ी कम करने की कोशिश की गई है.

ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने बताया कि राज्य सरकार को भी थोड़ी ज़िम्मेदारी दी गई है. इस क़ानून को लागू करने में ग्राम पंचायतों की केंद्रीय भूमिका होगी.

मसलन इस क़ानून के तहत रोज़गार योजनाओं का चयन पंचायतें ही करेंगी. इसके साथ ही निगरानी और ख़र्च का लेखा-जोखा भी पंचायतों के हाथ में होगा.

बुधवार को पेश किए जाने वाले इस महत्वपूर्ण विधेयक में संशोधन कर इस योजना में सभी को शामिल किया गया है. पहले प्रस्तावित विधेयक में सिर्फ़ ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वाले व्यक्ति को ही रोज़गार गारंटी देने की बात कही गई थी.

सरकार का दावा है कि ताज़ा विधेयक से वामपंथी पार्टियों को भी कोई शिकायत नहीं होगी और संसद के इसी सत्र में इस विधेयक को पास करके क़ानून की शक्ल दे दी जाएगी.

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