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रोज़गार और स्वास्थ्य पर ज़ोर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गणतंत्र दिवस के मौक़े पर राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने संदेश में बेरोज़गारी और स्वास्थ्य के मुद्दे पर ज़ोर दिया है. उन्होंने देश में और अधिक रोज़गार पैदा करने पर बल दिया है, उन्होंने कहा है कि अगले पाँच वर्षों में भारत को साढ़े सात करोड़ से अधिक रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए. राष्ट्र के नाम अपने संदेश में उन्होंने विवादास्पद मुद्दों को छोड़कर देश की प्रगति की चर्चा विस्तार से की है. उन्होंने कहा, "रोज़गार का सवाल सिर्फ़ उन भाग्यशाली लोगों के लिए नहीं है जो स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई कर चुके हैं. यह देश के सभी वर्गों के नौजवानों की छिनती मुस्कान, टूटते सपनों और निराश आँखों का सवाल है." राष्ट्रपति ने सूनामी का ज़िक्र करते हुए कहा कि लहरों की मार से भारत आहत ज़रूर हुआ है लेकिन उसका हौसला नहीं टूटा है. उन्होंने कहा, "हम सूनामी के कहर की वजह से दुखी हैं लेकिन हताश नहीं हैं. केंद्र और राज्य सरकारों ने पूरी गंभीरता और ईमानदारी से पीड़ित लोगों तक राहत पहुँचाने का काम किया है." राष्ट्रपति कलाम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती की चर्चा की, बढ़ते हुए विदेशी मुद्रा भंडार की बात कही और कहा कि सबसे बड़ी बात है कि भारत में युवाओं की आबादी 50 करोड़ से अधिक है जो देश को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे. स्वास्थ्य बीमा राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि ग़रीब लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा का प्रबंध किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा कि इसके लिए औद्योगिक घरानों, अस्पतालों और ग़ैर सरकारी संगठनों को भी आगे आना चाहिए. राष्ट्रपति का कहना था कि ग़रीबों को 10 रूपए प्रति माह के प्रीमियम पर यह बीमा सुरक्षा मिलनी चाहिए, उन्होंने कहा कि 10 रूपए प्रति माह देने वाले लोगों को मुफ़्त इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए जिसमें सभी रोगों का इलाज शामिल हो. राष्ट्रपति ने कहा कि इसके लिए एक अलग से कोष बनाने की ज़रूरत होगी जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को योगदान करना होगा. उन्होंने कहा कि जब यह स्वास्थ्य बीमा योजना लागू होगी तो इससे लगभग छह लाख डॉक्टरों और 12 लाख कर्मचारियों को रोज़गार मिलेगा. |
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