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'समृद्धि और विकास का मूल शिक्षा में है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की आज़ादी की 57वीं वर्षगाँठ की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सबसे ज़्यादा ज़ोर शिक्षा पर दिया है. उन्होंने 12 पृष्ठों के अपने संबोधन में कहा, "शिक्षा वास्तव में सत्य की खोज है, यह ज्ञान और प्रकाश की अंतहीन यात्रा है, अगर शिक्षा के यथार्थ को हरएक व्यक्ति अपने जीवन में अपना ले तो यह दुनिया रहने के लिए बेहतरीन जगह बन जाएगी." भूरे रंग के बंद गले का कोट पहने राष्ट्रपति ने इस भाषण में न सिर्फ़ शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर ज़ोर दिया बल्कि 'शिक्षा मिशन' के नाम से देश की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार की रूपरेखा भी प्रस्तुत की. राष्ट्रपति ने कहा, "हमें शिक्षा प्रणाली को उच्च नैतिक मूल्यों से जोड़कर उपयोगी और रोज़गारोन्मुख बनाना चाहिए." राष्ट्रपति ने अपने विज़न 2020 की बात दोहराते हुए कहा कि भारत अगले 16 वर्षों में विकसित राष्ट्र बनने की प्रक्रिया में है और शिक्षा के बिना यह संभव नहीं है. एपीजे अब्दुल कलाम ने प्रारंभिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण शिक्षा, विकलांग बच्चों के लिए शिक्षा जैसे हर विषय की चर्चा की और कहा कि समृद्धि और विकास के लिए शिक्षा सबसे ज़रूरी तत्व है. उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सुविधाओं तक हर व्यक्ति की पहुँच अत्यंत आवश्यक है, इस समय गाँवों और ग़रीब परिवारों के लिए शिक्षा आसानी से उपलब्ध नहीं है. राष्ट्रपति ने कहा कि भारत को अपने सकल घरेलू उत्पाद का छह-सात प्रतिशत तक शिक्षा पर ख़र्च करना चाहिए. राष्ट्रपति कलाम ने कहा, "मैं औद्योगिक घरानों से अपील करता हूँ कि सरकारी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए आगे आएँ और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान करें." अब्दुल कलाम ने शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ज़ोर दिया और कहा कि यही वजह है कि लोग पसंदीदा स्कूलों की तरफ़ भाग रहे हैं लेकिन सभी स्कूल ऐसे होने चाहिए जहाँ लोग अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजना चाहें. राष्ट्रपति ने प्रवेश परीक्षा, परीक्षा सुधार, छात्रों के मूल्यांकन और विज्ञान की शिक्षा पर भी अपने विचार विस्तार से प्रकट किए हैं. अन्य विषय अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इस पर संतोष प्रकट किया कि भारत में पिछले चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र की परंपरा के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीक़े से हो गया. राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी बनाए रखी है और "हम संयुक्त राष्ट्र को मज़बूत बनाने में विश्वास रखते हैं इस दिशा में काम कर रहे हैं." उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया की प्रगति और उसकी दिशा से मैं संतुष्ट हूँ." भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में कलाम ने कहा, "विकास दर को क़ायम रखना, मुद्गास्फीति को काबू में रखना और राजस्व घाटे को कम करना सरकार की प्रमुख चुनौतियाँ हैं." राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा कि देश में बिहार और असम जैसे राज्य हैं जहाँ हर साल बाढ़ आती है जबकि कई राज्यों में सूखा पड़ता है, ऐसे में व्यावहारिक जल प्रबंधन बहुत ज़रूरी है, उन्होंने कहा कि सरकार ने जल प्रबंधन को अपनी प्राथमिकता सूची में रखा है. |
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