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नन्हें पंकज ने की कलाम से बड़ी-बड़ी बातें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के गोपालगंज ज़िले के पंकज कुमार सिंह पहुँचे दिल्ली. आप सोच रहे होंगे कि इसमें बड़ी बात क्या है. बड़ी बात ये है कि गोपालगंज के भटवलिया गाँव के पंकज साढ़े आठ साल के हैं, पाँचवीं कक्षा में पढ़ते हैं और डेढ़ घंटे राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मुलाक़ात करके आए हैं. पंकज ने राष्ट्रपति कलाम के बच्चों से मिलने-जुलने की ख़बरें सुनी थी, तो उन्हें भी इच्छा हुई राष्ट्रपति से मिलने की. फिर क्या था उन्होंने अपनी इच्छा ज़ाहिर करते हुए राष्ट्रपति को पत्र लिखा. पंकज उस समय झूम उठे जब उनके पास मुलाक़ात का बुलावा भी आ गया.
पंकज कहते हैं कि राष्ट्रपति से मुलाक़ात के दौरान उन्होंने कुछ माँगें भी रखीं हैं. पंकज ने कहा, "मदन मोहन मालवीय काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एक हिंदू बहन को गोद लीजिए, सर सैयद अहमद मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ़ से एक मुस्लिम को गोद लीजिए. क्रिश्चियन विश्वविद्यालय केरल से एक ईसाई को गोद लीजिए और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से एक सिख को गोद लीजिए." राष्ट्रपति कलाम ने उनकी माँगों को ध्यान से सुना. बिहार में बाढ़ की स्थिति के बारे में भी पंकज ने राष्ट्रपति को जानकारी दी. राष्ट्रपति से इस बच्चे से वादा किया है कि जब भी वे बिहार आएँगे, उसके घर ज़रूर आएँगे. साथ ही इस बच्चे की पढ़ाई का सारा ख़र्च भी उठाने को राष्ट्रपति तैयार हो गए हैं. पंकज बड़े होकर राष्ट्रपति की तरह एक वैज्ञानिक बनना चाहते हैं और साथ ही देश की अन्य नामी-गिरामी हस्तियों से मिलना भी चाहते हैं. |
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