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वारंट निकालने वाला जज निलंबित
भारत की न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार का पर्दाफ़ाश करने की कोशिश के तहत एक टेलीविज़न पत्रकार ने एक मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर रिश्वत देकर राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और देश के मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध गिरफ़्तारी वारंट निकलवा दिया. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो सीबीआई को इसकी जाँच करने का आदेश दिया है. ब्रहम भट्ट नाम के इस मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है. सीबीआई ने पत्रकार और मजिस्ट्रेट के बिचौलिए के रूप में काम करने के आरोप में तीन वकीलों के ख़िलाफ़ आरोप दायर किए हैं. राष्ट्रपति कलाम के अलावा, मुख्य न्यायाधीश वीएन खरे, उच्चतम न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश बीपी सिंह और उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आर के जैन के विरुद्ध अहमदाबाद के एक मजिस्ट्रेट ने ये वारंट जारी किया. मजिस्ट्रेट ने बिना जाने-समझे इस वारंट पर हस्ताक्षर कर दिए. पत्रकार विजय शेखर ने दावा किया कि उन्होंने मजिस्ट्रेट को 40,000 रूपए दिए और इसका वीडियोटेप भी तैयार किया है. उनका दावा है कि उन्होंने ये काम दो स्थानीय वकीलों के ज़रिए करवाया. उनके अनुसार मजिस्ट्रेट ने 15 जनवरी को ये आदेश दिए. इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मामले की जाँच करके एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए. अदालत ने उन मजिस्ट्रेट, पत्रकार शेखर और मजिस्ट्रेट से ये काम कराने वाले दोनों वकीलों को नोटिस जारी किया है जिससे उनका बयान भी लिया जा सके. इससे पहले वर्ष 2001 में भ्रष्टाचार उजागर करने की कोशिश में तहलका डॉट कॉम वेबसाइट ने केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख घटक दल भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष को पैसे लेते हुए दिखाया था. पार्टी अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को इसके बाद इस्तीफ़ा देना पड़ा था. इसके बाद पिछले महीने चार राज्यों में हुए विधानसभा से पहले केंद्र के एक मंत्री दिलीप सिंह जूदेव को भी पैसा लेते वीडियोटेप पर दिखाया गया था. इस मामले में भी जूदेव को इस्तीफ़ा देना पड़ा. दोनों ही मामलों की जाँच का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. |
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