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राष्ट्रपति ने सरकार की प्राथमिकताएँ गिनाईं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों का खाका पेश किया है. उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों में गरीब जनता का ध्यान रखा जाएगा और सांप्रदायिकता से सख्ती से निबटा जाएगा. राष्ट्रपति ने रोज़गार पर ख़ास ज़ोर दिया और कहा कि हर ग्रामीण परिवार से एक व्यक्ति को कम से कम 100 दिन के रोज़गार की गारंटी दी जाएगी. राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सांप्रदायिकता और अयोध्या जैसे विवादास्पद मुद्दों का ज़िक्र करने के साथ-साथ आर्थिक नीतियों की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का साझा न्यूनतम कार्यक्रम वित्तीय अनुशासन के साथ आर्थिक वृद्धि पर ध्यान देता है. राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार खेती, उद्योग और सेवा क्षेत्र में मानवीय मूल्यों का ध्यान रखते हुए सुधार जारी रखेगी. जुलाई 2002 में राष्ट्रपति बनने के बाद से एपीजे अब्दुल कलाम ने चौथी बार संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया है. राष्ट्रपति चूँकि सरकार का ही हिस्सा होता है और वह सरकार की नीतियों को प्रतिबिंबित करता है. राष्ट्रपति के 16 पन्नों के अभिभाषण को सरकार एक जून को ही मंज़ूरी दे चुकी है. गुजरात, पोटा और अयोध्या राष्ट्रपति ने अपने भाषण में गुजरात के दंगों और अयोध्या मामले का भी ज़िक्र किया और कहा कि नई सरकार देश में धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि सरकार समाज में भाईचारे और शांति को नुक़सान पहुँचानेवाले तत्वों का सामना करने के लिए क़ानून का बिना किसी भय के पालन करेगी. राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार सांप्रदायिकता का मुक़ाबला करने के लिए एक आदर्श क़ानून लाएगी और सभी राज्यों से आग्रह करेगी कि वे इसका पालन करें. राष्ट्रपति ने कहा,"ये बहुत गंभीर बात है कि सांप्रदायिक ताक़तें देश में दुर्भावना फैला सकीं जिसके कारण दंगे हुए जिसका सबसे बदनुमा चेहरा गुजरात में देखने को मिला. मेरी सरकार ऐसी ताक़तों का मुक़ाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है". राष्ट्रपति ने आतंकवाद निरोधी क़ानून यानी पोटा की चर्चा करते हुए ये घोषणा की कि सरकार इस क़ानून के दुरूपयोग को देखते हुए इसे निरस्त करना चाहती है. उन्होंने कहा,"आतंकवाद का सामना करने में कोई समझौता नहीं किया जाएगा मगर सरकार समझती है कि मौजूदा क़ानूनों से ये काम हो सकता है. इसलिए सरकार पोटा को निरस्त करने का प्रस्ताव करती है". अभिभाषण में अयोध्या मामले का भी ज़िक्र था और राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार इस संबंध में अदालत के फ़ैसले का इंतज़ार करेगी और इस बीच बातचीत के ज़रिए मामले का समाधान करने की कोशिशों को बढ़ावा देगी. मगर उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत से निकले किसी भी हल को क़ानूनी तौर पर मान्यता मिलना आवश्यक होगा. आर्थिक नीतियाँ राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों का खाका भी पेश किया और कहा कि सरकार सात से आठ प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य हासिल करना चाहती है. उन्होंने क़ृषि और उद्योग में भारी निवेश करने, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देने, सरकारी उपक्रमों का चुनकर निजीकरण करने और कर नीतियों में सुधार का वायदा किया. उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी संस्थागत निवेशकों को बढ़ावा देने के साथ ही छोटे निवेशकों के हितों का भी ध्यान रखेगी और पूँजी बाज़ार पर नज़र रखनेवाली संस्था सेबी को मज़बूत बनाएगी. राष्ट्रपति ने कहा,"आर्थिक वृद्धि में तेज़ी के लिए निवेश की दर को बढ़ाना होगा जिसके लिए पूँजी बाज़ार का कायाकल्प करना होगा". कलाम ने कहा कि निजीकरण हर संस्था के लिए सोच-समझकर किया जाएगा और गंभीर रूप से घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को या तो बेच दिया जाएगा या उन्हें बंद कर दिया जाएगा मगर उससे पहले कर्मचारियों को उनका बचा वेतन और मुआवज़ा दिया जाएगा. राष्ट्रपति ने सरकार के इस वादे पर ज़ोर दिया कि 2009 तक राजस्व घाटे को दूर कर लिया जाएगा ताकि बुनियादी ढांचे के विकास में और निवेश किया जा सके. उन्होंने ये भी भरोसा दिलाया कि सरकार गाँवों में बुनियादी ढाँचा तैयार करने के लिए निवेश करेगी. |
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