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बुधवार, 02 जून, 2004 को 15:22 GMT तक के समाचार
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लोकसभा में भाजपा की धार कुंद हुई

भाजपा नेता
लोकसभा में धार कैसे तेज़ होगी?
भारतीय जनता पार्टी 2004 के चुनाव में न सिर्फ़ सत्ता से बाहर हुई है बल्कि लोकसभा में उसकी धार भी कुछ कुंद हो गई है.

मतलब ये है कि भाजपा के आक्रामक वक्ता और प्रवक्ता माने जाने वाले ज़्यादातर नेता या तो चुनाव हार गए या फिर वे राज्यसभा के सदस्य हैं.

इससे मौजूदा लोकसभा में भाजपा को अपनी धार कमज़ोर पड़ती ज़रूर नज़र आएगी और हो सकता है कि कभी-कभार वह वक्ताओं के मामले में कांग्रेस गठबंधन से पीछे छूटती नज़र आए.

अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ज़रूर लोकसभा में नज़र आएंगे लेकिन दूसरी पंक्ति के जाने-पहचाने वक्ता कम ही नज़र आएंगे.

अटल बिहारी वाजपेयी को भाजपा संसदीय दल का चेयरमैन बनाया गया है और लालकृष्ण आडवाणी लोकसभा में विपक्ष के नेता होंगे.

ग़ौर से देखा जाए तो वाजपेयी की बहस करने की क्षमता भी अब थोड़ी कमज़ोर नज़र आने लगी है और इसकी झलक चुनाव प्रचार के दौरान देखने को भी मिल चुकी है.

वाजपेयी एक बार यह तक भूल गए थे कि चुनाव लोकसभा के लिए हो रहे हैं या राज्यसभा के लिए.

कई बार अपनी ही पार्टी के उम्मीदवारों के नाम भूल गए जिनके चुनाव प्रचार के लिए वे सभाएँ कर रहे थे.

एक बार तो वाजपेयी पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल का ही नाम भूल गए.

और तो और मुसलमानों को रिझाने की कोशिश के तहत वाजपेयी घोषणा कर बैठे कि उर्दू अध्यापकों को दो करोड़ नौकरियाँ मुहैया कराई जाएँगी.

बाद में भाजपा प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी को यह कहकर पत्रकारों को समझाना पड़ा कि मसला संख्या का नहीं है बल्कि ये है कि उर्दू अध्यापकों के पद बनाकर उन पर नौकरियाँ दी जाएँगी.

राज्यसभा में

जानकार कहते हैं कि अगर वाजपेयी लोकसभा में भी बहस के दौरान ऐसा ही कर बैठते हैं तो स्थिति को कौन और कैसे संभालेगा.

जसवंत सिंह, प्रमोद महाजन, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुख़्तार अब्बास नक़वी तो सभी राज्यसभा के सदस्य हैं.

कपिल सिब्बल
सिब्बल वकील हैं और ज़ोरदार बहस करते हैं

अब लोकसभा में होने वाली बहस के बारे में हर बार पार्टी प्रवक्ता संवाददाता सम्मेलन करके तो सफ़ाई नहीं दे सकते.

पार्टी के 26 मंत्री हार चुके हैं जिनमें बहुत से ऐसे वक्ता हैं जो अक्सर स्थिति को संभालने में सक्षम होते हैं.

भाजपा सहित राजग खेमे के जो वरिष्ठ नेता हारे हैं उनमें यशवंत सिन्हा, राम नाइक, मुरली मनोहर जोशी, शहनवाज़ हुसैन, जगमोहन, विजय गोयल, साहिब सिंह वर्मा, मनोहर जोशी, नीतीश कुमार, शिव सेना के संजय निरुपम जैसे नाम शामिल हैं.

जबकि दूसरी तरफ़ कांग्रेस को तमाम बड़े नेताओं के अलावा कपिल सिब्बल, सचिन पायलट, संदीप दीक्षित, अखिलेश यादव जैसे नए चेहरे भी लोकसभा में पहुँचे हैं जो अपने-अपने क्षेत्र के धुरंधर हैं.

14वीं लोकसभा में एक और नया अध्याय जुड़ा है कि वामपंथी सांसद भारी संख्या में जीतकर आए हैं और आम तौर पर वामपंथी सांसद अपनी मौजूदगी ज़ोरदार ढंग से दर्ज कराते रहे हैं.

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद भी भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को सदन में बहस में ख़ासी टक्कर देंगे.

दूसरी तरफ़ समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसी पार्टियाँ सरकार के साथ नहीं होने के बावजूद भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए एक चुनौती साबित होंगी.

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