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'फ़ील गुड' नारे से नुक़सान हुआ: आडवाणी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि 'फ़ील गुड' और 'इंडिया शाइनिंग' जैसे नारों से पार्टी को चुनावों में नुक़सान हुआ है. लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार के बाद पहली बार पत्रकारों से बात करते हुए आडवाणी ने कहा कि इन सबके बावजूद उन्हें उम्मीद है कि पार्टी सत्ता में ज़रूर लौटेगी. आडवाणी ने दावा किया कि लोकसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को जनादेश नहीं मिला लेकिन यह भी स्वीकार किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को भी जनादेश नहीं मिला. आडवाणी ने कहा कि अपने अनुभवों के आधार पर उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी की सत्ता में वापसी तय है. 'नारा उलटा पड़ा' लालकृष्ण आडवाणी ने माना कि 'फ़ील गुड' नारे की शुरुआत उन्होंने ही पिछले साल की थी लेकिन यह चुनावों में पार्टी के लिए भारी पड़ा. उन्होंने कहा कि इस नारे के ख़िलाफ़ विपक्षी पार्टियों की रणनीति भाजपा के नारे पर भारी पड़ी. आडवाणी ने कहा कि उन्होंने सोचा था कि इस नारे के माध्यम से वे जनता तक एनडीए सरकार की पिछले पाँच-छह साल की उपलब्धियों को पहुँचा पाएँगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पूर्व उप प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनावों के नतीजे आश्चर्यजनक रहे और जो इस समय सत्ता में हैं उन्हें भी इसकी उम्मीद नहीं थी. आडवाणी ने कहा कि इन सबके बावजूद पार्टी का भविष्य उज्ज्वल है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि पार्टी सत्ता में ज़रूर लौटेगी. उन्होंने इन बातों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया की पार्टी को इसलिए नुक़सान हुआ क्योंकि पार्टी ने मुसलमानों को लुभाने की कोशिश की. आडवाणी ने कहा कि हिंदुत्व पर बीजेपी की विचारधारा में कोई बदलाव नहीं आया है और वह अपने सिद्धांतों पर क़ायम है. |
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