 |  साझा कार्यक्रम के मुताबिक़ सरकार चलेगी |
भारत में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) ने सरकार चलाने के लिए गुरूवार को अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम की घोषणा की. साझा कार्यक्रम पर बुधवार को गठबंधन के सभी सहयोगी दलों ने अपनी सहमति दे दी थी. न्यूनतम साझा कार्यक्रम के मुख्य बिंदु इस तरह हैं -
- देश के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने के प्रयास करना और इस दशक में 7-8 प्रतिशत की वार्षिक दर पर तक ले आना.
- आर्थिक प्रगति और निवेश के लिए रचनात्मक माहौल रखने के लिए करों की दर स्थिर रखना.
- केंद्रीय राजस्व घाटे को 2009 तक से छुटकारा पाना.
- मूल्य वर्धित कर (वैट) को पूरे देश में जितना जल्दी हो सके, लागू करना.
- काले धन को बाहर निकालने के लिए विशेष योजनाएँ चलाना.
- श्रम क़ानूनों में सिर्फ़ मजदूरों की भलाई के इरादे से संशोधन करना.
- सब्सिडी सिर्फ़ ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को ही दिए जाने के लिए इंतज़ाम.
- बिजली क़ानून 2003 पर फिर से विचार करना.
- निजी क्षेत्र में बिजली उत्पादन और वितरण को प्रोत्साहन और सहायता देना.
- विदेशी निवेश को बढ़ावा देना.
- विनिवेश मंत्रालय ख़त्म कर दिया जाएगा. विनिवेश विभाग वित्त मंत्रालय के अंदर की काम करेगा.
- किसानों को दिए जाने वाले क़र्ज़ पर ऊँची ब्याज दर से मुक्ति दिलाना.
- चीज़ों के सस्ते आयात के मामले में किसानों को संरक्षण देना.
- फ़ायदे में चल रही किसी भी सरकारी कंपनी को नहीं बेचना, जिनमें नवरत्न शामिल हैं. (फ़ायदा कमाने वाली नौ सरकारी कंपनियों को नवरत्न कहा जाता है और ये ज़्यादातर तेल, ऊर्जा और भारी उद्योग क्षेत्र में हैं.)
- विनिवेश के लिए हर कंपनी पर एक-एक करके विचार करना. नुक़सान में चल रही कंपनियों को कर्मचारियों की सहमति के साथ बेचना.
- सरकारी क्षेत्र के बैंकों को प्रबंध के क्षेत्र में स्वायत्तता देना.
- पैट्रोलियम क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना.
- देश के तेल भंडार की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली नीतियाँ बनाना.
- शिक्षा क्षेत्र ख़र्च किया जाने वाला धन बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत करना.
- बुनियादी शिक्षा सभी को मुहैया कराने का लक्ष्य हासिल करने के वास्ते सभी संघीय करों पर एक अतिरिक्त कर लगाना.
- निवेशकों, बुज़ुर्गों और पेंशनधारियों को राहत देने के लिए ब्याज दर नीति में बदलाव करना.
- फ़लस्तीनियों की अलग देश की माँग को समर्थन देने वाली नीति को आगे बढ़ाना.
- अरब देशों के साथ राजनयिक और आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने के लिए नई कोशिशें करना.
- पाकिस्तान के साथ ठोस बातचीत आगे बढ़ाना.
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