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न्यूनतम साझा कार्यक्रम का मसौदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम के मसौदे पर काँग्रेस के सहयोगी दलों के विचार लिए जा रहे हैं. समाचार माध्यमों के अनुसार मसौदे में कृषि क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और बिजली कंपनियों का निजीकरण न करने, रोजग़ार प्रदान करने और सांप्रदायिक हिंसा की रोकथाम के लिए कदम उठाने पर ज़ोर दिया गया है. कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का विनिवेश सोच समझकर किया जाएगा लेकिन विदेशी पूँजी निवेश को प्रोत्साहन दिया जाएगा. सार्वजनिक क्षेत्र की उन कंपनियों का निजीकरण पहले किया जाएगा जो घाटे में चल रही हैं और इस विषय में हर कंपनी के बारे में अलग से विचार होगा. इसमें अयोध्या मुद्दे के हल के लिए न्यायालय के फ़ैसले का इंतज़ार करने की बात है. न्यूनतम साझा कार्यक्रम के मसौदे के अनुसार सांप्रदायिक हिंसा की रोकथाम, ऐसी घटनाओं की जाँच केंद्रीय एजेंसी से करवाने और मुकदमे विशेष अदालतों में चलाने की बात भी कही गई है. समाचार माध्यमों के अनुसार मसौदे के तहत कट्टरपंथी ताकतों से सख़्ती से निबटने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का आश्वासन दिया गया है. |
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