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आडवाणी होंगे अब विपक्ष के नेता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जैसा कि पहले से तय दिखाई पड़ रहा था, भारतीय जनता पार्टी संसदीय दल ने मंगलवार को वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया. इस तरह पूर्व उपप्रधानमंत्री आडवाणी अब लोकसभा में विपक्ष के नेता होंगे. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को संसदीय दल का चेयरमैन चुना गया है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता जसवंत सिंह को भाजपा संसदीय दल का उपनेता भी चुना गया है. इस चुनाव के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि भाजपा एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी और संसद की परंपराओं का पालन करेगी. उन्होंने सत्तापक्ष को आगाह करते हुए कहा कि वो जनादेश को समझे और बदला लेने की प्रवृति के साथ काम न करे. आडवाणी का कहना था कि सरकार में शामिल दलों को जनादेश नहीं मिला है क्योंकि वे एनडीए की तरह चुनाव के पहले एक साथ नहीं थे और एक दूसरे के ख़िलाफ़ चुनाव लड़कर संसद में पहुँचे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने नेता प्रतिपक्ष के लिए अनिच्छा व्यक्त की थी और इसके बाद से ही माना जा रहा था कि लालकृष्ण आडवाणी यह पद संभाल सकते हैं. वाजपेयी को चेयरमैन बनाने के लिए भाजपा के संसदीय दल के संविधान में संशोधन किया गया. अब 77 साल के आडवाणी लोकसभा में उस भाजपा की कमान संभालेंगे जो छह साल केंद्र में सरकार चलाने के बाद विपक्ष की भूमिका निभाने जा रही है. अभी भाजपा को लोकसभा उपाध्यक्ष पद के लिए भी अपने उम्मीदवार का चयन करना है. हालाँकि लालकृष्ण आडवाणी का कहना था कि इसका फ़ैसला एनडीए को करना है. |
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