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मुशर्रफ़ ने वाजपेयी से बात की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से सोमवार को फ़ोन पर बात की. समाचार एजेंसियों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच लगभग 15 मिनट तक बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने ये इच्छा जताई कि भारत और पाकिस्तान के बीच की शांति प्रक्रिया को आगे ले जाया जाना चाहिए. वाजपेयी के प्रवक्ता अशोक टंडन ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया,"दोनों नेताओं ने माना कि दोनों ही देशों की तरफ़ से बेवजह के बयानों से बचा जाना चाहिए". परवेज़ मुशर्रफ़ ने इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी बात की थी. सराहना पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख रशीद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने दोनों देशों के बीच के मुद्दों को सुलझाने के लिए वाजपेयी के प्रयासों की सराहना की". शेख रशीद ने बताया कि मुशर्रफ़ ने वाजपेयी से शांति प्रक्रिया को आगे ले जाने में भूमिका निभाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा,"मुशर्रफ़ ने वाजपेयी से कहा कि उन्हें अपने अनुभव का इस्तेमाल भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए". बयानबाज़ी इससे पहले भारत ने सोमवार को विदेश मंत्री नटवर सिंह के बयानों पर पाकिस्तान की आपत्ति पर आश्चर्य प्रकट किया था. नटवर सिंह ने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत 1972 के शिमला समझौते के आधार पर ही होनी चाहिए. उनके इस बयान पर पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने ये कहा था कि अगर शिमला समझौता ही बातचीत का आधार है तो इससे समस्या सुलझने की जगह और बढ़ेगी. मसूद ख़ान के इस बयान पर भारत के विदेश सचिव शशांक ने कहा,"हम उम्मीद करते हैं कि जिस गंभीरता से हम दोनों पक्षों के बीच बातचीत की प्रक्रिया जारी रखना चाहते हैं, पाकिस्तान सरकार उसका सम्मान करेगी". |
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