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छपरा में 40 फ़ीसदी मतदान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के छपरा लोकसभा क्षेत्र में सोमवार को फिर से हुए मतदान में 40 प्रतिशत लोगों ने मत डाले. कुछ छुटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा. मतगणना दो जून को होगी जिसके बाद ही पता चलेगा कि यहाँ लालू यादव और राजीव प्रताप रूडी में से किसका पलड़ा भारी रहता है. छपरा में 26 अप्रैल को मतदान हुआ था लेकिन भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार राजीव प्रताप रूडी ने धांधली की शिकायतें की थीं. चुनाव आयोग ने जाँच के बाद मतदान रद्द करके फिर से मतदान के आदेश दिए थे. लालू यादव पहले ही मधेपुरा से चुनाव जीत चुके हैं. वहाँ उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के शरद यादव को हराया था. मतदान सोमवार को हुए पुनर्मतदान में लोगों का ज़्यादा उत्साह नहीं देखा गया. उसकी एक वजह तो भीषण गर्मी थी और दूसरी ये कि लालू प्रसाद यादव पहले ही मधेपुरा से चुनाव जीत चुके हैं. कुछ स्थानों पर छुटपुट झड़पों की ख़बरें मिलीं जिनमें कुछ लोग घायल हो गए. छपरा में पिछली बार जब मतदान हुआ था तो उस वक्त रूडी मंत्री थे मगर दोबारा जब मतदान हुआ तो लालू मंत्री थे. मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो इसके लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे. बूथ लुटेरों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए थे. जाँच 26 अप्रैल को छपरा में मतदान हुआ था लेकिन भाजपा उम्मीदवार राजीव प्रताप रूडी ने राजद पर मतदान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने के आरोप लगाए थे और चुनाव आयोग को कुछ वीडियो टेप सहित कई प्रमाण सौंपे थे.
इसके बाद चुनाव आयोग ने दो सदस्यीय जाँच दल बना दिया था. इस जाँच दल ने छपरा जाकर जाँच की थी. चुनाव आयोग के अनुसार जाँच दल ने पाया कि वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और बूथ लूटने की घटनाएँ हुईं. आयोग का कहना था कि संसदीय क्षेत्र के कई हिस्सों में सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और मतदाता दहशत में थे जिसकी वजह से ही यहाँ का मतदान रद्द करने का फ़ैसला हुआ. |
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