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बिहार में 12 बची सीटों पर मतदान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार की कुल 40 सीटों में से 28 के लिए वोट डाले जा चुके हैं. बाकी जिन 12 सीटों के लिए बुधवार को मतदान होगा, उनमें तीन केंद्रीय मंत्रियों- शरद यादव, सैयद शाहनवाज़ हुसैन और दिग्विजय सिंह के अलावा राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव उम्मीदवार हैं. राज्य के मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र पर देश भर की नज़र है क्योंकि वहाँ केंद्रीय खाद्य-आपूर्तिमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अम्मीदवार शरद यादव का मुक़ाबला राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार लालू प्रसाद यादव से है. लालू यादव छपरा लोकसभा सीट के लिए भी चुनाव लड़ रहे हैं. वहाँ केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने मतदान के दौरान व्यापक धाँधली की शिकायत है जिसकी जाँच चुनाव आयोग कर रहा है. मधेपुरा में होने वाले मतदान के दौरान भी लालू समर्थकों द्वारा बूथ कब्जा करने या अन्य गड़बड़ियों की आशंका व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं ने वहाँ प्रत्येक बूथ पर केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात करने की माँग की है. मधेपुरा बीबीसी से एक भेंटवार्ता के दौरान शरद यादव ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने संबंधी दायित्व चुनाव आयोग का है और यही दायित्व मधेपुरा में छपरा की तरह दाँव पर लगा हुआ है. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव की जमात से जुड़े गिरोहों ने बूथ लूटने की जो तैयारी की है, उसे विफल नहीं किया गया तो चुनाव आयोग की विश्वसनीयता जाती रहेगी. शरद यादव के ऐसे आरोपों को हार की आशंका से घिरे व्यक्ति का प्रलाप बताते हुए लालू यादव कहते हैं, मतदान के बाद शरद यादव फिर पिछले लोकसभा चुनाव की तरह धरने पर बैठ जाने का मन बना चुके हैं, इसलिए अभी से वे धाँधली का शोर मचा रहे हैं. मधेपुरा में इन दो यादव दिग्गजों की चुनावी भिड़ंत पहले भी दो बार हो चुकी है. वर्ष 1998 में लालू यादव ने शरद यादव को हराया था लेकिन वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में शरद यादव के हाथों लालू पराजित हो गए थे. कहा जा रहा है कि इस बार भी मुकाबला बहुत काँटे का है और दोनों तरफ से चलाए गए गहन प्रचार अभियान के कारण इस पूरे इलाक़े का राजनीतिक तापमान ख़ासा बढ़ा हुआ है. यादव बहुल इस संसदीय क्षेत्र में ग़ैर-यादव मतदाताओं का अधिक रुझान शरद यादव की तरफ दिखता रहा है. लेकिन इस बार रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी से राजद का गठबंधन हो जाने के कारण लालू यादव को दलित मतदाताओं से अधिक समर्थन की उम्मीद है. अन्य सीटें उधर किशनगंज लोकसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी सैयद शाहनवाज़ हुसैन को राजद प्रत्याशी तसलीमुद्दीन से कड़ी चुनौती मिल रही है. बाँका में जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी और केंद्रीय राज्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राष्ट्रीय जनता दल के गिरधारी यादव से कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है. कटिहार में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तारिक अनवर और भाजपा के निखिल कुमार चौधरी के बीच मुक़ाबला है. भागलपुर में भाजपा के सुशील कुमार मोदी और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के सुबोध राय आमने-सामने हैं. पूर्णिया संसदीय सीट के लिए मुकाबला सबसे चर्चित इसलिए हो गया है क्योंकि वहाँ से लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव जेल में रहते हुए चुनाव लड़ रहे हैं. वहाँ उनकी चुनावी भिड़ंत भाजपा के उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह से हो रही है. सहरसा में पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन यादव ने यहाँ के निवर्तमान सांसद दिनेश यादव के लिए भारी चुनौती पेश कर दी है. कुल मिलाकर बिहार की इन सभी बारह सीटों पर चुनावी संघर्ष राजग और राजद गठबंधन के बीच लगभग बराबर का हो गया है. यहाँ बुधवार को मतदान होना है. |
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