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भाजपा को हटाना ज़रुरीः वी पी सिंह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का कहना है कि समाज और देश की स्थिरता के लिए और ग़रीबों के हितों के लिए भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से हटाना ज़रुरी है. उन्होंने कहा कि वामपंथी दल और जनता दल (सेक्यूलर) उनकी पहली पसंद है लेकिन जहाँ ये पार्टियाँ नहीं हैं वे ख़ुद कांग्रेस को वोट देंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वो कांग्रेस को वोट दें. उन्होंने विदेशी मूल के मुद्दे को बेमतलब का विवाद बताया. कांग्रेस को वोट अपने निवास पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को इसलिए हटाना चाहिए क्योंकि वह समाज को बाँटने और घृणा की राजनीति करती है. उनका कहना था कि कांग्रेस देश की सबसे बड़ी पार्टी है जो सांप्रदायिक ताकतों का मुक़ाबला कर सकती है. इसलिए जहाँ लोगों के पास ये विकल्प न हो कि वे किसी धर्मनिरपेक्ष पार्टी को चुन सकें वहाँ उन्हें कांग्रेस को वोट देना चाहिए. उन्होंने माना कि कांग्रेस के साथ उनका विवाद रहा है लेकिन उनका कहना था कि ये मुद्दा अलग है. विदेशी मूल पूर्व प्रधानमंत्री का कहना था कि विदेशी मूल का मुद्दा बेमतलब उछाला जा रहा है.
उनका कहना था कि देश में सबसे बड़ा पद नागरिकता होती है और उसके आधार पर ही कोई देश का प्रधानमंत्री बन सकता है. उन्होंने कहा कि को नागरिकता देने के बाद उसकी निष्ठा पर सवाल नहीं उठाए जा सकते. वीपी सिंह ने पूछा कि भाजपा क्या यही मुद्दा फीजी और सुरिनाम जैसे देशों में भी उठाएगी? उन्होंने राहुल और प्रियंका को विदेशी मूल का बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि राजस्थान की मुख्यमंत्री की माता भी नेपाल की नागरिक थीं तो भाजपा उसके बारे में क्या करने जा रही है. भाजपा के मुद्दे विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भाजपा के मुद्दों की भी एक-एक कर बखिया उधेड़ी. उनका कहना था कि स्थिरता का नारा ही ग़लत है. पूर्व प्रधानमंत्री का कहना था कि यदि स्थिरता होती तो देश को आज़ादी नहीं मिलती, अमरीका में अभी भी दास प्रथा होती और ब्रिटेन में प्रजातंत्र ही नहीं आता. वीपी सिंह ने कहा कि इतिहास परिवर्तन का है और परिवर्तन होना चाहिए. फ़ीलगुड की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि आत्महत्या करते हुए किसानों को अनदेखा करके ये लोग ही फ़ीलगुड कर सकते हैं. उन्होंने भाजपा की तुलना नीरो से की. इसी तरह उन्होंने कहा कि जो भाजपा पहले मंदिर को आस्था का मुद्दा बता रही थी वही अब अदालती फैसले और बातचीत की बात कह रही है. |
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