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'आडवाणी जी से तभी पेशकश की थी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ राजनीतिज्ञ विश्वनाथ प्रताप सिंह का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने अयोध्या मसले देश को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोका है और अब उसे इसके लिए देश से माफ़ी मांगनी चाहिए. 1990 में मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू करने का ऐलान करके देश में एक नई राजनीतिक पहल करने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह "आपकी बात-बीबीसी के साथ" कार्यक्रम में रविवार को श्रोताओं के सवालों के जवाब दे रहे थे. वीपी के नाम से मशहूर दलित समर्थक नेता का कहना था कि भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी अयोध्या पर अदालती फ़ैसला मानने या आपसी सहमति से कोई हल निकालने की बात कह रहे हैं जबकि 15 साल पहले उन्होंने खुद ही इसकी पेशकश को ठुकरा दिया था. "लालकृष्ण आडवाणी 1990 में यह कहते थे कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मसला आस्था का सवाल है और इसे कोई अदालत नहीं सुलझा सकती." वीपी सिंह का कहना है कि उनकी सरकार ने बिल्कुल यही पेशकश की थी कि या तो अदालत का फ़ैसला मान लीजिए या आपसी समझौता कर लीजिए., "लेकिन आडवाणी और विश्व हिंदू परिषद ने इस पेशकश को सिरे से ठुकराते हुए कहा था कि यह आस्था का सवाल है और इसे कोई अदालत कैसे हल कर सकती है."
वीपी सिंह का कहना था, "अब आडवाणी उसी बात को कहकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि इन विकल्पों का विरोध कौन कर सकता है." वीपी सिंह का कहना था कि 15 साल पहले तो आडवाणी जी ने ही ख़ुद विरोध किया था इन विकल्पों का और देश को आग में झोंक दिया था. "इस दौरान सांप्रदायिक हिंसा में जो लोग मारे गए हैं, भारतीय जनता पार्टी को उन परिवारों से माफ़ी माँगनी चाहिए." मंडल ग़ौरतलब है कि 1989 के अंत में प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 15 अगस्त 1990 को मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने की घोषणा की थी. मंडल आयोग का गठन अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण की संभावनाओं के लिए सिफ़ारिशें पेश करने के लिए किया गया था.
विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जब मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने का ऐलान किया तो देश में जैसे बिल्कुल नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई थी. इस मुद्दे पर विश्वनाथ प्रताप सिंह का अब कहना है कि मंडल ने देश में एक नई राजनीतिक क्रांति की शुरूआत की है जिसने देश के दबे-कुचले तबके की सत्ता तक पहुँच को संभव बनाया है. विश्वनाथ प्रताप सिंह का कहना है कि मंडल सिफ़ारिशें लागू होने की वजह से ही पंचायतों से लेकर विधान सभाओं और संसद तक में स्थान आरक्षित हुए हैं और सरकारी नौकरियों में भी वंचित तबके के लोगों को फ़ायदा हुआ है. बोफ़ोर्स देश की राजनीति को लंबे समय से प्रभावित कर रहे बोफ़ोर्स मुद्दे पर विश्वनाथ प्रताप सिंह का कहना था कि सबसे पहले उन्होंने यह मुद्दा नहीं उठाया और राजीव गाँधी की मौत के बाद तो उन्होंने इस मुद्दे पर बात करना बिल्कुल बंद कर दिया है. उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह मुद्दा स्वीडन रेडियों ने उठाया था और उसके बाद हिंदू अख़बार ने कुछ दस्तावेज़ छापे थे. वीपी सिंह ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के पंद्रह दिन बाद इस मुद्दे की जाँच कराने की माँग की थी क्योंकि तत्कालीन सरकार इस पर भ्रामक जानकारियाँ दे रही थी. |
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