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भाजपा का साथ महँगा पड़ाः चंद्रबाबू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आँध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी ने कहा है कि हाल के चुनावों में हार की एक प्रमुख वजह भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करना था. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडु ने टीडीपी के वार्षिक अधिवेशन में कहा कि गुजरात दंगों के बाद बीजेपी का गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पद से नहीं हटाने का फ़ैसला उन्हें महँगा पड़ा. टीडीपी-बीजेपी गठबंधन को राज्य में विधानसभा की 294 सीटों में से केवल 49 सीटों पर जीत मिल पाई और राज्य में काँग्रेस गठबंधन ने एकतरफ़ा जीत पाई. नायडू ने कहा कि उनकी पार्टी ने वाजपेयी सरकार को समर्थन तो बाहर से दिया लेकिन राज्य की मुस्लिम आबादी को लगा कि गुजरात दंगों के लिए टीडीपी ज़िम्मेदार है. टीडीपी की वार्षिक बैठक में चुनाव के बाद पहली बार हार की समीक्षा की गई. खटास नायडू के बीजेपी पर इस तरह से खुलकर हमला करने से राज्य में सात साल से जारी टीडीपी-बीजेपी गठबंधन के भविष्य को लेकर संदेह व्यक्त किया जाने लगा है. इसके पहले राज्य के बीजेपी नेताओं ने चुनाव में हार के लिए टीडीपी के ख़राब प्रदर्शन को ज़िम्मेदार ठहराया था और कहा था कि उन्हें सत्ताविरोधी लहर का नुक़सान उठाना पड़ा. चंद्रबाबू नायडू ने भी पार्टी की बैठक में कहा कि टीडीपी के नौ वर्ष के शासन में वैसे तो सभी मोर्चों पर कामयाबी मिली लेकिन राज्य में सत्ताविरोधी लहर का असर ज़्यादा रहा. नायडू ने ये भी कहा कि उन्होंने सरकार के कामकाज पर ज़्यादा ध्यान दिया जिसकी वजह से वे पार्टी की गतिविधियों पर ध्यान नहीं दे सके. टीडीपी नेता ने कहा कि वार्षिक बैठक में इतनी संख्या में सदस्यों के जुटने से ये साफ़ संकेत मिलता है कि पार्टी हार से उबर रही है और एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रही है. |
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