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कांग्रेस गठबंधन को तीन चौथाई बहुमत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र प्रदेश सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिल गया है जबकि सत्ताधारी तेलुगू देशम पार्टी गठजोड़ को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है. कुल 294 सीटों में काँग्रेस गठबंधन ने 226 सीटें जीती हैं. तेलुगूदेशम और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को 49 सीटें मिलीं जिनमें से भाजपा को सिर्फ़ दो सीटों पर जीत मिली है. अकेले काँग्रेस के हाथ 184 सीटें लगी हैं. 19 सीटें अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के हाथ लगी हैं. कांग्रेस की सहयोगी तेलंगाना राष्ट्र समिति को 26, सीपीएम को नौ और सीपीआई को छह सीटें मिली हैं. आंध्र प्रदेश में वोटों की गिनती बाक़ी देश से पहले हुई क्योंकि वहाँ कार्यवाहक सरकार की छह महीने की अवधि 12 मई को पूरी हो रही थी और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप 13 मई तक नई विधानसभा का गठन हो जाना चाहिए. पिछली बार तेलुगु देशम पार्टी को 180 और भाजपा को 12 सीटें मिली थीं. काँग्रेस को पिछले चुनाव में केवल 91 सीटें मिली थीं. भविष्यवाणी
294 विधानसभा सीटों में से 267 पर चंद्रबाबू नायडू की तेलुगूदेशम ने चुनाव लड़ा जबकि बाक़ी 27 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. काँग्रेस ने तेलंगाना राष्ट्र समिति, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गठबंधन बनाया था. काँग्रेस को इस विधानसभा चुनाव में तेलंगाना राष्ट्र समिति के साथ गठबंधन का भी फ़ायदा स्पष्ट तौर पर नज़र आया. काँग्रेस राज्य में किसानों की आत्महत्या, सूखे और दूसरे मुद्दों को भुनाने में कामयाब हुई है. उधर लगता है कि नायडू की जल्दी चुनाव करवाने की रणनीति चल नहीं पाई. पिछले साल नवंबर में उनपर नक्सली हमला हुआ था जिसके बाद सहानुभूति लहर भुनाने की कोशिशों के तहत उन्होंने चुनाव जल्द कराने की सिफ़ारिश की थी. |
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