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कलाम ने बच्चों से सपने देखने को कहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने मध्यप्रदेश के ईटखेड़ी गाँव के बच्चों से कहा कि वो शहरी और ग्रामीण जीवन के अंतर को दूर करने का सपना देखें. उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली और कंप्यूटर जैसी सुविधाएँ गाँवों को भी मिलनी चाहिए. वह मंगलवार को भोपाल से नौ किलोमीटर दूर ईटखेड़ी के एक स्कूल के दौरे पर थे. राष्ट्रपति कलाम ने बच्चों से दोहराने को कहा, "सपने, सपने, सपने...सपनों को विचारों में बदलिए...और विचारों को कर्म में." उन्होंने विक्रम साराभाई का उदाहरण दिया कि कैसे उनके सपनों के कारण भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सका. कलाम ने ईटखेड़ी हायरसेकेंड्री स्कूल की प्रयोगशाला में बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडलों का अवलोकन किया. प्रशासन ने राष्ट्रपति की यात्रा से पहले जल्दी में स्कूल का कायाकल्प करने की कोशिश की. जहाँ दो दिन पहले पानी चू रहा था, रात-दिन काम कर उस स्कूल तक एक चौड़ी सड़क बना दी गई. दो नए कंप्यूटर लाकर रख दिए गए. लेकिन टूटी कुर्सियों और नए कंप्यूटर का मेल सारा सच बखान कर रहा था. |
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