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प्रधानमंत्री का आर्थिक विकास का नारा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आर्थिक विकास के लिए कृषि और रोज़गार पर आधारित रणनीति की बात कही है. स्वतंत्रता दिवस की 57वीं सालगिरह पर लाल क़िले से अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सात क्षेत्रों में विशेष ध्यान देगी. जिसका सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में भी उल्लेख है. अपने भाषण में उन्होंने कहा कि देश का निर्माण वैसा ही होगा जैसे उसके नागरिक होंगे. उनका कहना था कि इंसाफ़ और इंसानियत फले-फूले और हर नागरिक शिक्षित हो. प्रधानमंत्री ने सूखे और बाढ़ से पीड़ित किसानों की दिक़्क़तों का भी ज़िक्र किया और उनका कहना था कि रोज़गार के अवसर बढ़ाने होंगे. नौ साल बाद किसी काँग्रेसी प्रधानमंत्री को लाल क़िले से राष्ट्रीय ध्वज फहराने का मौक़ा मिला है. मनमोहन सिंह से पहले काँग्रेस के प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने 1995 में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. प्रधानमंत्री ने अपने 45 मिनट के भाषण में कोई नया वादा तो नहीं किया लेकिन सरकार के स्तर पर कामकाज में सुधार पर ज़ोर दिया.
आर्थिक सुधार की बात करते हुए उन्होंने सात क्षेत्रों के नाम गिनाए. ये क्षेत्र हैं- कृषि, जल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, शहरी इलाक़ों में सुधार और आधारभूत क्षेत्र. मनमोहन सिंह ने कहा, "ये सात सूत्र विकास के पुल के स्तंभ हैं. हमें उच्च आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के लिए इस दिशा में काम करने की ज़रूरत है." उन्होंने कहा कि सरकार के लिए अपनी नीतियाँ और कार्यक्रम लागू करना ही चुनौती है. 'आतंकवाद' लाल क़िले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शांति, संपन्नता, सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए आपसी मेल-मिलाप बहुत ज़रूरी है.
उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी राष्ट्र विरोधी और समाज विरोधी ताक़तों को हराना होगा. मनमोहन सिंह ने कहा, "आतंकवाद हमारी ज़िंदगी का सबसे बड़ा ख़तरा बन गया है. हमें संगठित होकर इससे लड़ना होगा. हिंसा से किसी भी समाज की प्रगति नहीं हो सकती." प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे वे आतंकवादी हों या सांप्रदायिक शक्तियाँ - सभी विघटनकारी शक्तियों से हमें मुक़ाबला करना होगा. पड़ोसियों के साथ संबंध अपने भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंधों के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ शांति प्रयास जारी रहेंगे. लेकिन उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि सीमा पार हिंसा से बातचीत पर असर पड़ सकता है. मनमोहन सिंह ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्तों के लिए आपसी भरोसा बहुत ज़रूरी है. चीन के साथ संबंध पर मनमोहन सिंह ने कहा, "भारत चीन के साथ अपने रिश्तों को मज़बूत रखना चाहता है. सीमा विवाद पर हम बातचीत की प्रकिया को आगे बढ़ाना चाहते हैं." |
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