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रविवार, 05 जून, 2005 को 21:01 GMT तक के समाचार
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छत्तीसगढ़ में रोज़गार यात्रा पर लाठीचार्ज

प्रोफ़ेसर ज़्यां द्रेज़
प्रोफ़ेसर ज्यां द्रेज़ ने पिछले हफ़्ते ही केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सलाहकार परिषद से इस्तीफ़ा दिया है.
देशभर में रोज़गार गारंटी कानून लागू किए जाने की माँग को लेकर 13 मई को दिल्ली से देशव्यापी रोज़गार अधिकार यात्रा शनिवार को जब छत्तीसगढ़ में बलरामपुर पहुँची तो स्थानीय प्रशासन ने उनका स्वागत लाठीचार्ज से किया.

यात्रा में शामिल लोगों के मुताबिक़ प्रशासन ने रोज़गार अभियान यात्रा के कार्यकर्ताओं को नक्सली कहते हुए सभा करने से मना किया और उनपर लाठीचार्ज किया.

लाठीचार्ज में यात्रा का नेतृत्व कर रहे जाने-माने अर्थशास्त्री और केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य प्रोफ़ेसर ज़्यां द्रेज़ समेत करीब दो दर्जन लोग घायल हुए हैं.

ग़ौरतलब है कि यात्रा को सत्तारूढ़ यूपीए सरकार के तमाम घटक दलों समेत वामपंथी दलों और देशभर के क़रीब डेढ़ सौ जनसंगठनों का समर्थन प्राप्त है.

इस घटना के बारे में ज़्यां द्रेज़ बताते हैं, "हम शांतिपूर्वक सभा कर रहे थे और नाटक का कार्यक्रम चल रहा था. तभी वहाँ सादी वर्दी में कुछ पुलिसवाले आए और 10 मिनट बाद कुछ और पुलिसकर्मी पहुँच गए."

वे बताते हैं, "पुलिसकर्मी एके-47 और लाठियों से लैस थे. उन्होंने सभा का कारण जाने बगैर ही लोगों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया."

पर क्यों

पर स्थानीय प्रशासन घटना में अपनी ग़लती स्वीकार करने के बजाय पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ने में लगा हुआ है.

 हमें इस बारे में कोई सूचना नहीं थी. क्षेत्र नक्सली हिंसा की दृष्टि से संवेदनशील है और हम यात्रा के बारे में अनभिज्ञ थे, नहीं तो ऐसी घटना न होती.
एसआरपी कलूरी, पुलिस अधीक्षक

इस बाबत पुलिस अधीक्षक एसआरपी कलूरी ने बीबीसी को बताया, "हमें इस बारे में कोई सूचना नहीं थी. क्षेत्र नक्सली हिंसा की दृष्टि से संवेदनशील है और हम यात्रा के बारे में अनभिज्ञ थे, नहीं तो ऐसी घटना न होती."

यात्रा में शामिल लोगों के मुताबिक़ कार्यक्रम की सूचना राज्य के मुख्य सचिव को दे दी गई थी पर स्थानीय प्रशासन ऐसी किसी भी जानकारी से साफ़ इंकार कर रहा है.

हालांकि रविवार को देर शाम तमाम जनसंगठनो और समाचार माध्यमों के सक्रिय होने के बाद क्षेत्र के आईजी अमरनाथ उपाध्याय ने मामले में हस्तक्षेप किया और मामले की प्रथमिकी दर्ज कर ली गई.

देशभर के तमाम समाजसेवी संगठनों और रोज़गार अधिकार यात्रा से जुड़े लोगों ने इसे प्रशासन का ग़ैरज़िम्मेदाराना और बर्बर रवैया करार दिया है.

 इस बारे में प्रशासन की कोई भी दलील बेबुनियाद है. इससे यह साफ़ हो गया है कि यहाँ पर लोगों का नहीं, प्रशासन का राज चल रहा है. वो जो चाहे करें और जो चाहें करें.
ज़्यां द्रेज़, अर्थशास्त्री

इस बाबत ज़्या द्रेज़ बताते हैं, "इस बारे में प्रशासन की कोई भी दलील बेबुनियाद है. इससे यह साफ़ हो गया है कि यहाँ पर लोगों का नहीं, प्रशासन का राज चल रहा है. वो जो चाहे करें और जो चाहें करें."

वो कहते हैं, "जब इस तरह का बर्ताव उन लोगों के साथ हो रहा है, जो दिल्ली से पूरी मीडिया और बड़े समर्थन के साथ यहाँ पहुँचे हैं तो स्थानीय लोगों के साथ इन लोगों का क्या रवैया होगा, इसका साफ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है."

अपनी 45 दिनो की देशव्यापी यात्रा पर निकले रोज़गार अधिकार अभियान के ये लोग अबतक हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र औऱ राजस्थान के तमाम ज़िलों में आम सभाएँ कर चुके हैं.

अभियान के लोगों का कहना है कि इस घटना का यात्रा के कार्यक्रम पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यात्रा जारी रहेगी.

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