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ग़रीबों के लिए नया रोज़गार कार्यक्रम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक नए "काम के बदले अनाज" कार्यक्रम की 14 नवंबर से शुरूआत की है. उन्होंने यह नया कार्यक्रम आंध्र प्रदेश में रंगा रेड्डी ज़िले के अलूर गाँव से शुरू किया. इस कार्यक्रम से देश के उन 150 ज़िलों में ग़रीबों को रोज़गार और खाद्य सामग्री मुहैया कराई जाएगी जो सूखे से प्रभावित हैं. कार्यक्रम के तहत ख़ासतौर से उन ग़रीबों को राहत मिलेगी जिनके पास कोई कामकाज नहीं है. प्रधानमंत्री ने इस मौक़े पर कहा कि इस कार्यक्रम को रोज़गार गारंटी योजना में तब्दील कर दिया जाएगा. इस कार्यक्रम को पूरा धन केंद्र सरकार से मिलता है आंध्र प्रदेश के आठ ज़िलों में इस कार्यक्रम को चलाया जा रहा है. केंद्र सरकार इस कार्यक्रम के लिए क़रीब 25 अरब रुपए और बीस लाख टन चावल दे रही है और यह धन और खाद्य सामग्री ग्रामीण इलाक़ों में ग़रीबों के लिए होगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम से ग्रामीण विकास की प्रक्रिया तेज़ होगी, ख़ासतौर से कृषि क्षेत्र में सिंचाई के साधनों का विकास होगा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ग्राम परिषदों और प्रशासन का आहवान किया कि वे इस कार्यक्रम को असरदार तरीक़े से लागू करने के लिए मिलजुलकर काम करें. उन्होंने आम लोगों से भी अनुरोध किया कि वे इस कार्यक्रम को लागू करने में सरकार के साथ सहयोग करें. ग़ौरतलब है कि पिछली सरकार का चलाया हुआ ऐसा ही कार्यक्रम वजूद में है और नया कार्यक्रम उसका स्थान लेगा लेकिन नए कार्यक्रम में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं जो पिछले कार्यक्रम में नहीं हैं. नए कार्यक्रम में ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले ग़रीब लोगों को काम के बदले 75% खाद्य सामग्री और 25% नक़दी दी जाएगी ताकि उनकी सारी ज़रूरतें पूरी हो सकें. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी ने कहा कि इस कार्यक्रम को राज्य में शुरू करने से यह बात ज़ाहिर होती है कि प्रधानमंत्री यहाँ सूखे और अन्य समस्याओं से प्रभावित लोगों के बारे में चिंता करते हैं. |
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