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भूमिहीनों की ज़मीन देने की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र प्रदेश में सरकार के साथ सीधी बातचीत में तीसरे दिन नक्सली नेताओं ने भूमिहीन लोगों को ज़मीन दिए जाने का मामला उठाया है. राज्य के ग़रीब लोगों को सरकार की ओर से खेती के लिए भूमि दिए जाने की नक्सलियों की माँग पर रविवार को पूरे दिन चर्चा होती रही. राज्य के गृह मंत्री जना रेड्डी ने बताया है कि नक्सली नेताओं से कहा गया है कि वे अपनी माँग लिखित रूप में दें ताकि सरकार उस पर पूरी तरह से ग़ौर कर सके. उन्होंने कहा, "भूमिहीनों के बीच भूमि का वितरण एक जटिल काम है जिसे कुछ दिनों की बातचीत में हल नहीं किया जा सकता." माँगें इससे पहले शनिवार की बातचीत में नक्सली नेताओं ने आंध्र प्रदेश सरकार को अपनी माँगों की लंबी सूची सौंपी थी जिसमें लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाया गया था. इनमें विद्रोही गुटों के सदस्यों के ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को वापस लेने, राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और फ़रार नक्सलियों के ऊपर रखे गए इनामों को वापस लेने जैसी माँगें शामिल हैं. नक्सली वार्ताकारों ने आंदोलन से जुड़े लोगों पर आतंकवाद निरोधक क़ानून न लगाए जाने की माँग की और कहा कि जिन लोगों पर इस क़ानून के तहत मुक़दमा चल रहा है उन्हें वापस लिया जाए. इतना ही नहीं, नक्सली नेताओं ने माँग की कि पिछले वर्ष अक्तूबर में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर हमला करने के आरोप में गिरफ़्तार लोगों पर भी मुक़दमा न चलाया जाए. इसके अलावा, नक्सली वार्ताकार रामकृष्णा ने कहा कि उन पुलिसकर्मियों को सज़ा मिलनी चाहिए जिन्होंने ज़मींदारों और पूंजीपतियों की हिमायत करने वाले हथियारबंद गिरोह बनाने में मदद की है. गृह मंत्री जना रेड्डी ने इतना ही बताया कि नक्सली नेताओं की माँगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार करने का आश्वासन दिया गया है. |
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