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पीपुल्स वार को बातचीत की पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में नक्सली संगठन पीपुल्स वार ग्रुप के साथ सीधी बातचीत की पेशकश की है. राज्य के अधिकारियों ने बताया है कि गृहमंत्री के जाना रेड्डी ने पीपुल्स वार के नेताओं को दो अक्तूबर को बातचीत के लिए बुलाया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बातचीत के लिए कोई शर्त नहीं रखी है. अगर विद्रोही आगे आते हैं तो दोनों पक्षों के बीच ये पहली सीधी बातचीत होगी. इसके पहले राज्य सरकार ने विद्रोहियों के मध्यस्थों के साथ बातचीत की मगर उस बातचीत में गतिरोध आ गया था. वार्ता इस मुद्दे पर अटक गई थी कि विद्रोहियों ने शांति वार्ता के दौरान हथियार त्यागने से मना कर दिया जबकि सरकार ऐसा चाहती थी. सराहना इस सप्ताह हैदराबाद में नक्सली हिंसा और चरमपंथी समस्या पर नौ राज्यों के मुख्यमंत्री की बैठक भी हुई थी. ये बैठक केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल की अध्यक्षता में हुई. पाटिल ने बैठक के बाद कहा कि केंद्र को चरमपंथी समस्या को हल करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर पूरा भरोसा है. उन्होंने इस सिलसिले में आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य सरकारों को इससे सीख लेने का सुझाव दिया. पीपुल्स पीपुल्स वार ग्रुप को आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रतिबंधित गुट घोषित कर रखा था मगर इस वर्ष जुलाई में ये प्रतिबंध हटा लिया गया. आंध्र प्रदेश में नक्सली हिंसा की समस्या दो दशक से भी अधिक पुरानी है. 80 के दशक में वहाँ वामपंथी विचारधारा वाले विद्रोहियों ने भूमिपतियों और सत्ताधारियों के ख़िलाफ़ हथियार उठाए हुए हैं. इस संगठन पर 1992 में जन सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगाया गया था. वर्ष 1995 में इस पर एक वर्ष के लिए ढील दी गई और फिर प्रतिबंध लगा दिया गया था. |
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