BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 28 जुलाई, 2004 को 13:11 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
प्रतिबंध हटने के बाद पीपल्स वॉर की रैली

रैली
पीपल्स वार ने बातचीत की तो हामी भरी है मगर हथियार त्यागने से इनकार किया है
आँध्र प्रदेश में सक्रिय नक्सली संगठन पीपल्स वॉर ग्रुप ने प्रतिबंध हटने के बाद पहली बार आमसभा की जिसमें एक लाख से भी ज़्यादा लोग जुटे.

ये रैली मोगलीचेरला गाँव में आयोजित हुई और इसमें बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएँ भी आए.

पीपल्स वार ने क़रीब एक दशक के बाद ऐसी कोई जनसभा बुलाई.

आँध्र प्रदेश सरकार ने पीपल्स वॉर ग्रुप पर लगा प्रतिबंध पिछले सप्ताह हटाने की घोषणा की थी.

पीपल्स वॉर ने कहा है कि वह बातचीत तो करेगी मगर उसने सशस्त्र संघर्ष छोड़ने से इनकार किया है.

रैली

ग़दर
रैली में विद्रोही लोकगीतकार ग़दर

पीपल्स वार ने अपनी रैली भारत में हिंसक वामपंथी आँदोलन की शुरूआत करनेवाले नेता चारू मजुमदार की पुण्यतिथि की याद में बुलाई.

रैली में संगठन का कोई भी बड़ा नेता नहीं आया और जो भी सदस्य आए वे सादे कपड़ों में थे और उन्होंने कोई शस्त्र नहीं लिया हुआ था.

मुख्य वक्ता थे विद्रोही लोकगीतकार ग़दर, लेखक जी कल्याण राव और कवि वारवरा राव.

ये तीनों लोग राज्य सरकार के साथ विद्रोही संगठन की जारी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

इन तीनों ने स्पष्ट किया कि पीपल्स वार ने हथियार त्यागे नहीं हैं मगर वह बातचीत के दौरान इनका इस्तेमाल नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि पीपल्स वार ने जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए हथियार उठाया और अब वे सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं क्योंकि उनके पास इसके लिए जनमत है.

मोगलीचेरला में जनसभा इसलिए आयोजित की गई क्योंकि यह पीपुल वॉर ग्रुप के नेता पी सुदर्शन रेड्डी का पैतृक गाँव भी है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>