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आंध्र में विद्रोहियों से वार्ता में गतिरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र प्रदेश में सरकार और विद्रोही गुट पीपुल्स वार ग्रुप के बीच बातचीत में गतिरोध आ गया है. ये गतिरोध शांतिवार्ता के दौरान पीपुल्स वार के हथियार त्यागने को लेकर शुरू हुआ जिसके लिए विद्रोही तैयार नहीं हैं. शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के गृहमंत्री, विद्रोहियों के दूत और दूसरे मध्यस्थों के बीच बातचीत में यही मुद्दा छाया रहा. विद्रोहियों ने हथियार त्यागने की सरकार की माँग मानने से ये कहते हुए मना कर दिया है कि शांतिवार्ता के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी. उन्होंने मतभेद वाले मुद्दों को परे रखकर इसपर सीधी बातचीत के दौरान विचार करने का प्रस्ताव रखा है. मध्यस्थों ने इस प्रस्ताव को सराहा है मगर सरकार ने ये कहते हुए अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है कि इसपर विचार की ज़रूरत है. राज्य के गृहमंत्री जाना रेड्डी ने ये भी कहा कि सरकार और विद्रोहियों के बीच के संघर्षविराम को बढ़ाने का फ़ैसला भी इसी बात पर निर्भर करेगा कि शांतिवार्ता पटरी पर रहती है कि नहीं. दोनों पक्षों के बीच जारी संघर्षविराम की अवधि 16 सितंबर को ख़त्म हो रही है. इस बीच आंध्र प्रदेश के पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की सरकार ने राज्य में पीपुल्स वार और उसके अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है. राज्य सरकार का कहना है कि ऐसा एहतियात के तौर पर किया गया है क्योंकि आंध्र प्रदेश में संगठन पर लगी पाबंदी हटा लिए जाने के बाद विद्रोही उनके राज्य में आने की कोशिश कर सकते हैं. |
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