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रोज़गार गारंटी विधेयक लोकसभा में पेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के एक व्यक्ति को साल में 100 दिन रोज़गार की गारंटी देने वाली महात्वाकांक्षी योजना का विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत कर दिया गया है. ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा है कि सरकार एक ऐतिहासिक योजना लागू करने जा रही है. इस विधेयक के सोमवार तक लोकसभा में पारित होने और इसके बाद इसी सत्र में इसे राज्यसभा में भी पारित किए जाने की संभावना है. इस विधेयक के कुछ बिंदुओं पर असहमति के अलावा आम तौर पर इस राजनीतिक दल इस विधेयक के समर्थन में हैं. यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा है कि इस विधेयक से यूपीए के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण संकल्प पूरा होने जा रहा है. पंचायतों के हाथ में राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी विधेयक के पारित होकर क़ानून बन जाने के बाद शुरू में 200 ज़िलों में लागू किया जाएगा. इस क़ानून को लागू करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका होगी.
जैसा कि विधेयक के नाम से ज़ाहिर है इसे ग्रामीण क्षेत्रों में ही लागू किया जाएगा. इस योजना के तहत हर व्यक्ति को कम से कम 100 दिन काम देने की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी और अगर सरकार ऐसा करने में नाकाम रहती है तो उसे बेरोज़गारी भत्ता देना होगा. उन्होंने बताया कि एक प्रावधान यह भी रखा गया है कि ज़रूरत पड़ने पर केंद्र सरकार भी न्यूनतम मज़दूरी तय करेगी. इस योजना में महिला कामगारों को प्राथमिकता दी जाएगी. ऐसी रोज़गार गारंटी योजना महाराष्ट्र में 1978 से लागू है और इस समय भी चल रही है. सुझाव इस विधेयक का आम तौर पर स्वागत करते हुए भारतीय जनता पार्टी नेता कल्याण सिंह ने कुछ आपत्तियाँ भी दर्ज की हैं और विधेयक में सुधार के सुझाव दिए हैं.
उन्होंने कहा कि रोज़गार गारंटी के लिए जो राशि एक परिवार को देने की बात कही जा रही है उस छह हज़ार रुपए से या पाँच सौ रुपए महीने की राशि से कोई परिवार नहीं चल सकता. इसलिए विधेयक में एक सदस्य को रोज़गार देने की जगह हर काम करने वाले व्यक्ति को रोज़गार की बात करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस योजना की निगरानी का काम ग्राम पंचायत की जगह ग्राम सभा को दिया जाना चाहिए और इसमें गड़बड़ी के लिए जिस अधिकारी को दोषी पाया जाता है तो उसे पाँच हज़ार का जुर्माना और तीन महीने की क़ैद दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि ग़रीबी सिर्फ़ ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं है और इसे शहरी क्षेत्रों के लोगों के लिए भी लागू किया जाना चाहिए. संसद में इस विधेयक पर चर्चा जारी है. |
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