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तीन सरकारी बैंकों के ब्याज दरों में वृद्धि | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तीन सरकारी बैंकों ने मुद्रास्फीति के बढ़ रहे दबाव में अपने ऋण दरों में बढ़ोतरी की है. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मुद्रा नीति को सख़्त करते हुए पिछले दो सप्ताह में दूसरी बार बैंको की ओर से जमा रखी जाने वाली नकद राशि में बढ़ोतरी की है. अब बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक तीनों ही सरकारी बैंकों ने अपने 'प्राइम दरों' में आधी फ़ीसदी की बढ़ोतरी कर दी है. गुरुवार को जारी आँकड़ों में मुद्रा स्फीति की दर में 6.73 प्रतिशत हो गई है. सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों में कमी की घोषणा भी कर दी है. जेपी मॉर्गन के राजीव मलिक के मुताबिक इन उपायों से मुद्रास्फीति को कम करने में जल्दी मदद मिल सकती है. उन्होंने कहा, "यदि हाल के आयात शुल्क में कटौती, मुद्रा नीति को सख़्त किए जाने और बजट में अन्य शुल्कों में भी कटौती किए जाने जैसे कदमों को एक साथ देखें, तो अगले महीने तक मुद्रास्फीति में कमी आनी शुरु हो सकती है." | इससे जुड़ी ख़बरें भारत का व्यापार घाटा क़ाबू में: रेड्डी24 जून, 2005 | कारोबार ब्याज दरों में मामूली वृद्धि25 अक्तूबर, 2005 | कारोबार भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो दर बढ़ाई24 जनवरी, 2006 | कारोबार सरकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर28 जुलाई, 2006 | कारोबार अहम ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं 31 अक्तूबर, 2006 | कारोबार स्टेट बैंक की शाखा इसराइल में भी07 दिसंबर, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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