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भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो दर बढ़ाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय रिज़र्व बैंक ने मंगलवार को रेपो दर में 0.25 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की है. बेहतर आर्थिक प्रगति के कारण मुद्रा स्फ़ीति बढ़ने की आशंका के चलते रेपो दर बढ़ाई गई है. बैंक ने रिवर्स रेपो दर भी 0.25 फ़ीसदी से बढ़ा दी है और अब वो 5.5 फ़ीसदी हो गई है. ताज़ा बढ़ोतरी के बाद अब रेपो दर 6.5 फ़ीसदी हो गई है. ये वो दर है जिस पर रिज़र्व बैंक कम अवधि के लिए दूसरे व्यवसायिक बैंकों को धनराशि उधार देता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये दोनों दरें आने वाले महीनों में फिर बढ़ सकती हैं. कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी के बाद रिज़र्व बैंक ने 31 मार्च तक के वित्तीय वर्ष के लिए अब आर्थिक विकास के लिए 7.5- 8.0 फ़ीसदी का पूर्वानुमान दिया है. भारतीय रिज़र्व बैंक पिछले साल अप्रैल के बाद से दो बार पूर्वानुमान के आँकड़े बढ़ा चुका है. 2005 में अप्रैल में बैंक ने अनुमान लगाया था कि अर्थव्यवस्था सात फ़ीसदी की दर से बढ़ेगी. लेकिन अच्छे मॉनसून के चलते पिछले कुछ महीनों में कृषि उत्पादन बढ़ा है. बैंक का कहना है, "इस वक़्त अगर नीति में थोड़ा बदलाव कर लें, तो आर्थिक विकास पर पड़ने वाले बुरे असरे से बचा जा सकता है." बैंक ने कहा है कि तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू स्तर पर बढ़ती माँग के चलते मुद्रा स्फ़ीति भी बढ़ सकती है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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