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तेल की क़ीमतों को लेकर चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
न्यूयॉर्क के बाज़ार में पहली बार तेल की क़ीमत 75 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची है. और ऐसा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद चल रहा है और उस पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा चल रही है. यदि सुरक्षा परिषद के रास्ते ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो इस बात के आसार हैं कि ईरान तेल का निर्यात रोक देगा और इससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ेगा. वॉशिंगटन में एक बैठक में भाग लेने आए ग्रुप-7 देशों के वित्त मंत्रियों ने कहा है कि तेल की इस तरह की क़ीमत से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. ब्रिटेन के वित्तमंत्री गोल्डन ब्राउन ने कहा है कि इसका वैश्विक असर हो सकता है. उनका कहना था कि इसके लिए ईरान जैसे तेल उत्पादक देश में अस्थिरता जितनी दोषी है उतना ही दोष एशियाई देशों में बढ़ती ईंधन की खपत भी है. अमरीका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ़्रांस, कनाडा और इटली ने कहा है कि चीन के व्यापार असंतुलन को ठीक करने की बात कही है. जी-7 देशों ने अमरीका के व्यापार संतुलन को भी ठीक करने की बात कही है. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़ में तेल से होनेवाली आय में कमी19 फ़रवरी, 2006 | कारोबार बुश ने कहा, तेल निर्भरता कम करेंगे01 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना रूस और यूक्रेन के बीच गैस विवाद31 दिसंबर, 2005 | कारोबार अफ़्रीकी तेल बाज़ार में भारत की रूचि24 नवंबर, 2005 | कारोबार बड़ी कंपनियों की नज़र भारतीय भंडार पर17 अक्तूबर, 2005 | कारोबार तेल आपूर्ति बढ़ाने पर ओपेक की बैठक19 सितंबर, 2005 | कारोबार तेल की कीमतें फिर ऊपर गईं10 अगस्त, 2005 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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