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महँगाई के कारण घट सकता है सीमा शुल्क | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एसोचैम के एक आकलन के मुताबिक आने वाले बजट में बढ़ती महँगाई पर अंकुश लगाने के लिए सीमा शुल्क में कटौती हो सकती है. एसोचैम के बिजनेस बैरोमीटर सर्वे (एबीबी) में देश की 150 कंपनियों के सीईओ में से अधिकतर की राय है कि वित्त मंत्री पी चिदंबरम सीमा शुल्क को 12.5 प्रतिशत से घटा कर 10 प्रतिशत करने की घोषणा कर सकते हैं. इससे कुछ ज़रुरी सामानों और उद्योगों के लिए कच्चे माल की क़ीमतों में कमी आएगी. 72 फ़ीसदी सीईओ का कहना है कि सीमा शुल्क में कटौती सिर्फ़ महँगाई के मद्देनज़र ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की प्रतिबद्धताओं के लिहाज से भी ज़रूरी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कई बार कर दरों को दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों (आसियान) के स्तर पर लाने की बात कह चुके हैं. एसोचैम के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत कहते हैं, "तेज़ी से बढ़ रही मुद्रास्फ़ीति पर थोड़ा बहुत नियंत्रण कच्चे तेल पर उत्पाद कर घटाने से भी हो सकता है. उद्योग जगत से जुड़े अधिकतर लोगों की ऐसी राय है कि बजट में वित्त मंत्री उत्पाद कर घटाने की घोषणा कर सकते हैं." कृषि क्षेत्र सर्वेक्षण में शामिल सीईओ में से अधिकतर ने माना कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए इसमें सरकारी निवेश बढ़ाए जाने की ज़रूरत है. सर्वेक्षण के मुताबिक ऐसी संभावना है कि बजट में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कर की दरें कम की जा सकती है. खुद एसोचैम अध्यक्ष का कहना है, "आर्थिक विकास दर नौ फ़ीसदी बनाए रखने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए बजट में कृषि पर विशेष ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है." 54 फ़ीसदी सीईओ का आकलन है कि प्राथमिक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बजट आवंटन बढ़ सकता है. देश में निवेश के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करने से संबंधित नए प्रयास बजट में किए जा सकते हैं. लगभग 65 फ़ीसदी सीईओ की राय में सड़क, बंदरगाह और बिजली के क्षेत्र में निवेश करने की योजना बना रही कंपनियों को बजट में कुछ नए तोहफ़े मिल सकते हैं. |
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