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शनिवार, 27 जनवरी, 2007 को 11:06 GMT तक के समाचार
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'व्यापार वार्ता शुरू होनी चाहिए'
कमलनाथ
बैठक में भाग लेने के लिए कमलनाथ भी दावोस में हैं
स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में शनिवार को दुनिया के करीब तीस देश इस बात पर सहमत हो गए हैं कि व्यापार वार्ता जल्द शुरु होनी चाहिए.

लेकिन मंत्रियों की ओर से आए बयान में इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई थी.

विकासशील और विकसित देशों के राजनेताओं ने कहा है कि अगर वार्ता विफल रही तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

दावोस में पिछले वर्ष हुए इक्नॉमिक फ़ॉरम में एक महत्वाकांक्षी योजना पर सहमति हुई थी लेकिन इसका कुछ नतीजा नहीं निकला था.

व्यापार के उदारीकरण को लेकर किसी सहमति पर पहुँचने के मकसद से दावोस वार्ता को काफ़ी अहम माना जा रहा है.

जुलाई के बाद अगर कोई समझौता होता है तो अमरीकी कांग्रेस ऐसे किसी समझौते या उसके किसी हिस्से को नकार सकता है.

जुलाई से पहले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के पास अधिकार है कि वो इन समझौतों को पारित करवा सकते हैं.

विश्व व्यापार संगठन के निदेशक पास्कल लैमी ने कहा है कि अमरीका सरकार इस अधिकार की सीमा आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी.

कृषि सब्सिडी

इस बार भी बातचीत में कृषि का मुद्दा ही अड़चन बनता नज़र आ रहा है.
विश्व व्यापार संगठन की दोहा दौर की बातचीत पिछले साल जुलाई में कृषि सब्सिडी पर मतभेद के बाद ठप्प हो गई थी.

विकासशील देश चाहते हैं कि अमरीका कृषि सब्सिडी घटाए और यूरोपीय देश अपना आयात शुल्क कम करें.

उधर समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शुक्रवार को भारत सहित 33 विकासशील देशों ने व‌र्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम (डब्ल्यूईएफ) की बैठक के दौरान दोहा दौर की वार्ता की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की.

उस बैठक में भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ का कहना था, "विश्व व्यापार वार्ता में विकासशील देशों के करोड़ों ग़रीब किसानों की आजीविका की अनदेखी नहीं की जा सकती."

उन्होंने कहा कि यदि इस वार्ता को आगे बढ़ाना है तो संवेदनशीलता के साथ परस्पर सम्मान कायम किया जाना चाहिए.

दरअसल व्यापार वार्ताओं का उद्देश्य दुनिया भर में कृषि, औद्योगिक उत्पाद और सेवा क्षेत्र में व्यापार की राह में आ रही बाधाओं को कम करना है.

दावोस में चल रही वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम की बैठक का आज अंतिम दिन है. इसमें व्यापार और राजनीतिक क्षेत्र के तकरीबन 24 सौ नेता भाग ले रहे हैं.

फ़ोरम की बैठक में ग्लोबल वार्मिंग से लेकर वैश्वीकरण और विकासशील देशों को सहायता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई.

समापन सत्र में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर विश्व के सामने चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे.

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