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रविवार, 02 जुलाई, 2006 को 07:52 GMT तक के समाचार
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बैठक बीच में छोड़ आए कमलनाथ
कमलनाथ
कमलनाथ का कहना है कि उन्होंने डब्लूटीओ को बता दिया है कि बातचीत की दिशा से भारत सहमत नहीं है
भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ विश्व व्यापार संगठन की जिनीवा में चल रही बैठक के बीच में ही छोड़कर लौट आए हैं.

लौटकर उन्होंने कहा था कि वहाँ जो चर्चा चल रही थी वह भारत के हित में नहीं जा रही थी.

इससे पहले ही उन्होंने कहा था कि विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) वार्ता में मुख्य मुद्दों पर कोई समझौता होने की संभावना नहीं है.

उन्होंने कहा था कि वे इस वार्ता से जल्दी ही वापस आ रहे हैं क्योंकि उनके वहाँ रहने से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि भारत के बिना डब्लूटीओ का कोई समझौता संभव भी नहीं है. ख़ासकर कृषि के क्षेत्र में तो नहीं.

किसानों का हित

 मैं डब्लूटीओ की बैठक में भारतीय किसानों के हित में कुछ लेने गया था, भारतीय किसानों की ओर से कुछ देने नहीं
कमलनाथ

वापस लौटने के बाद कमलनाथ ने कहा, "मैं डब्लूटीओ की बैठक में भारतीय किसानों के हित में कुछ लेने गया था, भारतीय किसानों की ओर से कुछ देने नहीं."

उन्होंने कहा कि वे चाहते थे भारतीय उद्योगों की हितरक्षा हो और आर्थिक विकास हो लेकिन वहाँ चर्चा उस दिशा में नहीं बढ़ रही थी.

लौटने से पहले वाणिज्य मंत्री ने साफ़-साफ़ शब्दों में कहा था कि बातचीत का दौर संकट में फँस गया है और जिन प्रमुख मुद्दों पर समझौता होना था, अब वो नहीं हो सकता.

स्विटज़रलैंड के जिनीवा शहर में विश्व व्यापार संगठन की बातचीत चल रही है.

इस बैठक में पचास से ज़्यादा देश कृषि सब्सिडी और अन्य उत्पादों पर शुल्क कम करने के लिए प्रस्तावों पर बातचीत कर रहे हैं.

विश्व व्यापार संगठन में अमीर और विकासशील देशों के बीच मामला इसलिए फँस गया है क्योंकि अमरीका और यूरोपीय देश चाहते हैं कि भारत जैसे विकासशील देश उनके माल के लिए अपने बाज़ारों को पूरी तरह खोल दें.

साथ ही वे ये भी चाहते हैं कि विकासशाल देश विदेशी माल के आयात पर लगी पाबंदियाँ दूर कर दें.

लेकिन भारत हमेशा इस मुद्दे पर बराबरी का व्यवहार किए जाने की माँग करता रहा है.

डब्ल्यूटीओडब्ल्यूटीओ का डर
भारतीय किसानों को डर है कि कहीं उनके हितों को ताक पर न रख दिया जाए.
किसानडब्लूटीओ से डरे किसान
किसानों को डर है कि भारत सरकार अमरीका के दबाव में काम कर रही है.
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