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प्रदर्शनों के बीच डब्लूटीओ में समझौते का मसौदा पेश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हाँगकाँग में चल रहे विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के सम्मेलन की समाप्ति के एक दिन पहले सदस्य देशों के सामने समझौते का मसौदा पेश किया गया है. लेकिन अभी तक इस पर कोई सहमति नहीं हो पाई है. इस दौरान सम्मेलन केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों और दंगा पुलिस के बीच झड़प हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस के गोले छोड़े. दूसरी ओर अमरीका के उप व्यापार प्रतिनिधि पीटर एल्गियर ने उम्मीद जताई है कि अगले 24 घंटे में समझौता हो सकता है. भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने भी बीबीसी हिंदी को हाँगकाँग से फ़ोन पर बताया कि जो मसौदा पेश किया गया है उस पर अगले 24 घंटो तक बात चलेगी और उन्हे उम्मीद है कि समझौता हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस समझौते मे भारत की कुछ मांगो को माना गया है लेकिन कुछ बातों पर आपत्ति भी है. उन्होंने आपत्तियो पर खुल कर बात नहीं कि लेकिन इस बैठक मे भारत की सबसे बड़ी उपल्बधि गिनाते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे विकासशील देशो के साथ हुआ गठबंधन सबसे महत्वपूर्ण है. हाँगकाँग से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सम्मेलन में पाँच दिन हो चुकी बातचीत के बाद भी कोई समझौते की उम्मीद नहीं कर रहा है. क्योंकि इस दिशा में काफ़ी कम प्रगति हुई है. हाँगकाँग में चल रही बातचीत रविवार रात को ख़त्म हो जाएगी. इस दौर की बातचीत का मक़सद था दुनिया के ग़रीब देशों में विकास को बढ़ावा देना. लेकिन कई विकासशील देशों ने समझौते के मसौदे की यह कहकर आलोचना की है कि इसमें उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया है. सहमति नहीं चार साल पहले दोहा में जब इस दौर की बातचीत शुरू हुई थी तो ये कहा गया था कि इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय विकास है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हाँगकाँग में पेश किए गए समझौते के मसौदे में इसके भटकाव दिख रहा है. बीबीसी संवाददाता के अनुसार धनी देशों में कृषि सब्सिडी ख़त्म करने की कोई तारीख़ तय करने पर अभी भी सहमति नहीं हो पाई है. जबकि अमरीकी कपास उत्पादकों की सहायता में कटौती के उपाय उस हद तक नहीं हो पाए हैं जिससे अफ़्रीकी कपास उत्पादकों को राहत मिल सके. दूसरी ओर बैंकिंग, पर्यटन और बीमा जैसे सेवा क्षेत्र में शर्तें थोपने की बात विकासशील देशों को नागवार गुजर रहा है. हाँगकाँग में चल रही बातचीत रविवार को ख़त्म हो रही है लेकिन पहले ही कुछ देशों ने धमकी दी है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे बातचीत बीच में ही छोड़कर चले जाएँगे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि डब्लूटीओ वार्ता में पहली बार ऐसा हुआ है कि विकासशील देश उन मुद्दों पर एकजुट हैं, जिन्हें वे नापसंद कर रहे हैं. प्रदर्शन सम्मेलन के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और दंगा पुलिस के बीच झड़प हो गई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस के गोले छोड़े.
सम्मेलन केंद्र के बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अवरोध को तोड़ कर अंदर घुसने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों के हाथ में डंडे थे और उन्होंने स्टील के अवरोधों को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया और सम्मेलन केंद्र का दरवाज़ा बंद कर दिया. प्रदर्शनकारियों में दक्षिण कोरिया के किसान, दक्षिण पूर्वी एशियाई ग्रुप और यूरोपीय आंदोलनकारी शामिल थे. प्रदर्शनकारियों में एक फ़्रांस के किसान ज़ोज़े बोवे भी शामिल थे, जिन्होंने 1999 में अपने घर के निकट एक वैश्वीकरण विरोधी प्रदर्शन के दौरान मैकडोनल्ड्स फ़ास्ट फूड रेस्टोरेंट में तोड़-फोड़ की थी और सुर्ख़ियाँ बटोरी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें डब्लूटीओ सम्मेलन में वीटो की धमकी16 दिसंबर, 2005 | कारोबार व्यापार मुद्दे पर अमीर देशों की आलोचना15 दिसंबर, 2005 | कारोबार 'समझौता नहीं हुआ तो संरक्षणवाद बढ़ेगा'14 दिसंबर, 2005 | कारोबार डब्ल्यूटीओ की बातचीत में अहम मुद्दे13 दिसंबर, 2005 | कारोबार मतभेदों के बीच डब्लूटीओ की बैठक शुरू13 दिसंबर, 2005 | कारोबार बातचीत में ठोस प्रगति ज़रूरी:अन्नान13 दिसंबर, 2005 | कारोबार मेंडलसन ने सब्सिडी मुद्दे पर आगाह किया12 दिसंबर, 2005 | कारोबार सऊदी अरब को डब्लूटीओ की सदस्यता11 नवंबर, 2005 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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