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शुक्रवार, 16 दिसंबर, 2005 को 10:46 GMT तक के समाचार
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डब्लूटीओ सम्मेलन में वीटो की धमकी
डब्लूटीओ
इस बैठक में भी कृषि सब्सिडी का मसला छाए रहने की उम्मीद है
अफ़्रीका, कैरीबियाई और प्रशांत ग्रुप के विकासशील देशों ने हाँगकाँग में चल रहे विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) सम्मेलन में किसी भी नए समझौते को वीटो करने की धमकी दी है.

77 देशों के इस ग्रुप में दुनिया के कई ग़रीब देश भी शामिल हैं. इस ग्रुप का कहना है कि वे वैसे किसी समझौते को स्वीकार नहीं कर सकते जो कपास, केला और चीनी के लिए यूरोपीय बाज़ार में उनकी पहुँच को ख़त्म करता हो.

मॉरिशस के कृषि मंत्री आर्विन बूलेल का कहना है कि अगर उनके ग्रुप की चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो अन्य मुद्दों पर भी सहमति नहीं होगी.

दक्षिण अमरीकी देशों के केला उत्पादक तरजीह दिए जाने वाले शर्तों को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं. इन देशों का कहना है कि इससे डब्लूटीओ के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है.

हाँगकाँग स्थित बीबीसी के आर्थिक संवाददाता का कहना है कि सम्मेलन में यूरोपीय संघ के कृषि सब्सिडी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बहुत कम प्रगति हुई है और इससे किसी समझौते की कम ही उम्मीद है.

व्यापार अवरोध

डब्लूटीओ सम्मेलन में व्यापार अवरोधों को कम करने की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है. कुछ देशों के लिए यह बड़ी समस्या खड़ी कर रहा है.

डब्लूटीओ सम्मेलन के विरोध में भी प्रदर्शन हो रहे हैं

कुछ विकासशील देशों की तरजीह के आधार पर कई धनी देशों के बाज़ार तक पहुँच है लेकिन व्यापार अवरोध कम करने से उनको मिलने वाला लाभ कम हो जाएगा.

इन्हीं में से एक देश मॉरिशस भी है जो इस व्यवस्था का लाभ उठाकर विश्व बाज़ार से अधिक क़ीमत पर चीनी यूरोपीय संघ के देशों को बेचता है.

यूरोपीय देशों की नीति से पहले से ही नाराज़ ये देश अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आगे होने वाले बदलाव से उन्हें और नुक़सान हो सकता है.

हाँगकाँग से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस समूह के देशों की चेतावनी मायने रखती है क्योंकि डब्लूटीओ ऐसा संगठन है जो सहमति से चलता है.

इसके अलावा कई विकासशील देश केला और कपास के व्यापार को लेकर भी अपनी आपत्ति जता चुके हैं. कृषि सब्सिडी कम करने को लेकर यूरोपीय संघ के देशों पर पहले से ही दबाव है.

यूरोपीय वार्ताकारों का तर्क है कि पहले अन्य देश औद्योगिक सामान के साथ-साथ बैंकिंग और दूरसंचार सेवा जैसे क्षेत्रों में पहल करें.

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