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विप्रो का मुनाफा उम्मीद से ज़्यादा
विप्रो प्रमुख अज़ीम प्रेमजी
विप्रो के ग्राहकों में नोकिया और जनरल मोटर्स जैसी कंपनियाँ भी शामिल हैं
भारत की एक प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो का पिछली तिमाही का मुनाफा बाज़ार की उम्मीदों से कहीं ज़्यादा रहा है.

कंपनी को बीते तीन महीनों में 765 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है जो पिछली तिमाही के मुक़ाबले 9.25 फीसदी ज़्यादा है.

पिछली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 700 करोड़ रुपए का रहा था.

इस तरह साल 2006 में अक्तूबर से दिसंबर तक के तीन महीनों के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा 40 फ़ीसदी से भी ज़्यादा का रहा है.

इस तिमाही में कंपनी का राजस्व भी 12 प्रतिशत बढ़कर 3979 करोड़ रुपए हो गया है.

इससे पहले विप्रो की दो प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ टाटा कंसलटेन्सी सर्विसेज़ और इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज़ ने भी अपने भारी मुनाफ़े की घोषणा की.

टाटा कंसलटेन्सी के मुनाफ़े में जहाँ 47 फ़ीसदी की बढोतरी हुई है वहीं इन्फोसिस ने अपने मुनाफ़े में 52 प्रतिशत की बढोतरी दर्ज की है.

विप्रो का कहना है कि गत तिमाही में विप्रो 37 नए ग्राहक बनाने में सफल रही वहीं इसने 4,997 नए लोगों की भी भर्ती की और अब इसके कर्मचारियों की कुल संख्या 66 हजार एक सौ छिहत्तर हो गई है.

कंपनी ने सितंबर 2006 में अपने कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ाया था.

कंपनी का कहना है कि इस तिमाही का लगभग 72 प्रतिशत राजस्व दूसरे देशों से प्राप्त मांगों से हुआ है जिसमें से ज़्यादातर अमरीका से प्राप्त हुए.

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