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विप्रो के आउटसोर्सिंग प्रमुख का इस्तीफ़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सूचना प्रोद्योगिकी क्षेत्र की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी विप्रो के आउटसोर्सिंग मुखिया कंपनी को विदा कह रहे हैं जिससे पिछले एक महीने में विप्रो के किसी बड़े अधिकारी का छोड़कर जाने का यह दूसरा मामला है. विवेक पॉल विप्रो के वाइस चेयरमैन भी हैं और अब वह इस कंपनी को छोड़कर अमरीका जा रहा है जहाँ वह एक अन्य कंपनी में नई ज़िम्मेदारी संभालेंगे. पॉल का अमरीका में घर भी है. विप्रो ने पश्चिमी देशों की बड़ी कंपनियों को आउटसोर्सिंग सेवाएँ मुहैया कराने में अपनी अच्छी साख बनाई है. विवेक पॉल से पहले विप्रो के एक बड़े अधिकारी रमन रॉय सितंबर 2004 में इसे छोड़कर चले गए थे. पॉल का कहना था कि विप्रो छोड़कर नई कंपनी में काम करने के पीछे उनकी नई चुनौतियाँ संभालने की मंशा है. 45 वर्षीय विवेक पॉल 1999 में जनरल इलेक्ट्रॉनिक कंपनी से विप्रो में आए थे. उस वक़्त विप्रो का कारोबार एक साल में दस गुना बढ़कर क़रीब एक अरब 90 करोड़ डॉलर हो गया था. विवेक पॉल विप्रो के कॉल सेंटरों की ज़िम्मेदारी संभालते थे और उनपर पश्चिमी देशों की कंपनियों के ज़्यादा से ज़्यादा कॉल सेंटर हासिल करने की ज़िम्मेदारी भी थी. विप्रो ने कहा है कि अब वह अपने प्रबंधन में फेरबदल की योजना के तहत प्रेसीडेंट और वाइस चेयरमैन के पद समाप्त कर रही है. विप्रो के चेयरमैन अज़ीम प्रेमजी के पास कंपनी के 84 प्रतिशत मालिकाना अधिकार हैं. |
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