|
माइक्रोसॉफ़्ट का भारत में बड़ा समझौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर की महारथी कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट ने भारत की दो बड़ी कंपनियों से हाथ मिलाया है और यह समझौते के तहत करोड़ों रुपए का कारोबार होगा. भारत की बड़ी सॉफ़्टवेयर कंपनियों इन्फ़ोसिस और विप्रो के साथ हुए इस समझौते के बाद अनुमान लगाया गया है कि माइक्रोसॉफ़्ट भारत में मौजूदा 1500 को बढ़ाकर जल्दी ही दो गुना कर देगा. माइक्रोसॉफ़्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीव बैलमर ने आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में सोमवार को अपना नया मुख्यालय शुरू करते हुए यह जानकारी दी. इस समझौते के बाद अब इन्फ़ोसिस और विप्रो अपने सॉफ़्टवेयर उत्पादों में माइक्रोसॉफ़्ट की तकनीक का प्रयोग कर सकेंगे. इन्फ़ोसिस के साथ हुए समझौते के मुताबिक़ दोनों कंपनियाँ क़रीब अस्सी लाख डॉलर का निवेश करके कंपनियों के लिए विभिन्न तरह की सेवाओं का एक नेटवर्क तैयार करेंगी और यह निवेश सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में होगा. इन्फ़ोसिस के मुख्य कार्यकारी नंदन निलेकनी ने बंगलौर में कहा, "हमारी कंपनियाँ अपनी संपत्ति और हुनर एक साथ मिलकर प्रयोग करने पर राज़ी हुए हैं और इससे हमारी ग्राहक कंपनियों को एक अनोखी विशेषज्ञता से फ़ायदा उठाने का मौक़ा मिलेगा." विप्रो से हुए वित्तीय समझौते का कोई ब्यौरा नहीं दिया गया है. माइक्रोसॉफ़्ट ने दो बड़ी भारतीय कंपनियों से यह समझौता ऐसे समय किया है जब उसे अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी लीनक्स से भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. लीनक्स के सॉफ़्टवेयर को इंटरनेट से मुफ़्त डाउनलोड किया जा सकता है. जबकि माइक्रोसॉफ़्ट अपने सॉफ़्टवेयर के लिए लाइसेंस शुल्क लेती है. माइक्रोसॉफ़्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीव बैलमर अपने तीन दिन के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे. माइक्रोसॉफ़्ट ने हैदराबाद में जो अपना नया मुख्यालय बनाया है वह अमरीका से बाहर उसका सबसे बड़ा दफ़्तर है और माइक्रोसॉफ़्ट ने कहा है कि आगामी कुछ महीनों में कई सौ कंप्यूटर शिक्षित लोगों की भर्ती करेगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||