| इंफ़ोसिस के मुनाफ़े में भारी वृद्धि | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फ़ोसिस ने बताया है कि सितंबर में ख़त्म हुई तिमाही में उसके मुनाफ़े में 35 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. कंपनी ने बताया है कि उसे इस अवधि में छह अरब रूपए से अधिक का मुनाफ़ा हुआ है. वित्त वर्ष 2005-2006 की दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल आय थी 22.94 अरब रूपए, पिछले एक वर्ष में कंपनी की कुल आय में 31 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. इन्फ़ोसिस के प्रबंध निदेशक नंदन नीलकेनी ने कहा, "यह तिमाही काफ़ी अच्छी रही है, हमारे कामकाज की मात्रा में भी बढ़ोतरी हुई है." नीलकेनी ने बताया कि वर्ष 2004 में कंपनी को एक अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने में पूरा एक वर्ष लगा था जबकि इस बार "हम पहले छह महीने में वहाँ तक पहुँच गए हैं." इन्फ़ोसिस ने इस वर्ष अपने कर्मचारियों की संख्या में भी भारी वृद्धि की है. इस वर्ष आठ हज़ार से अधिक लोग कंपनी से जुड़े और इन्फ़ोसिस का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक उसके कर्मचारियों की संख्या 46 हज़ार तक हो जाएगी. कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी मोहनदास पै का कहना है कि "पिछली तिमाही में कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वीज़ा दिलाने में ही 75 लाख डॉलर ख़र्च किए." उन्होंने बताया कि कंपनी ने भारी निवेश के बावजूद अपनी विकास दर को बनाए रखा है. इस तिमाही में इन्फ़ोसिस की सेवाएँ लेने के लिए 34 नए ग्राहक सामने आए, इनमें से पाँच तो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हैं. इसी तरह इन्फ़ोसिस को दस लाख डॉलर से अधिक का ठेका देने वाली कंपनियों की संख्या भी बढ़कर 170 से 191 हो गई है. इन्फ़ोसिस इसी वित्त वर्ष में बंगलौर स्थित अपने दफ़्तर का आकार भी बढ़ाने जा रहा है ताकि बढ़ी हुई ज़रूरत पूरी की जा सके. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||