210 खरब डॉलर टैक्स दायरे से बाहरः रिपोर्ट

रिपोर्ट कहती है कि निजी बैंक पैसों को सुरक्षित जगहों पर जमा कराने में अमीरों की मदद करते हैं

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वैश्विक कर चोरी के बारे में एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में अभी कम-से-कम 21 ट्रिलियन डॉलर यानी 210 खरब डॉलर की राशि ऐसी जगहों पर हैं जहाँ कर अधिकारी नहीं पहुँच सकते.

ये राशि अमरीका और जापान की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद के योग के बराबर है.

ये अध्ययन एक अभियानकारी संस्था टैक्स जस्टिस नेटवर्क ने करवाया है.

इसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे निजी बैंक सुपर-रिच यानी अतिधनवान लोगों की सहायता करते हैं जिससे कि वे अपने पैसों को गोपनीय स्थानों पर जैसे स्विट्ज़रलैंड और केमैन द्वीपसमूहों जैसी जगहों पर ले जा पाते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल-संपन्न राष्ट्रों में विशेष रूप से ऐसा होता है जहाँ से पैसे अपने देश में निवेश होने के स्थान पर विदेशों में चले जाया करते हैं.

विदेशों में जमा धन के बारे में अब तक के इस सबसे विस्तृत अध्ययन की रिपोर्ट ब्रिटेन के अख़बार ऑब्ज़र्वर में प्रकाशित की गई है.

रिपोर्ट जाने-माने कन्सल्टेन्सी फ़र्म मैक्किन्सी के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री और टैक्स हेवेन यानी करों से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों के विशेषज्ञ जेम्स हेनरी ने तैयार की है.

केंद्रीय बैंकों के अंतर्सरकारी संगठन – बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स – और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष जैसे स्रोतों से लिए गए आँकड़ों पर आधारित रिपोर्ट में कहा है कि कई विकासशील देशों में 1970 के बाद से जितना पैसा देश से बाहर गया है वो उनके सारे कर्ज़ों को अदा कर देने के लिए पर्याप्त होता.

रिपोर्ट कहती है, "समस्या ये है कि इन देशों में संपत्तियाँ बस कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित होती है जबकि कर्ज़ का भार उनकी सरकारें साधारण लोगों के कंधों पर डाल दिया करती हैं."

विश्व में असमानता को रेखांकित करती हुई रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में लगभग 100 खरब डॉलर की संपत्ति मात्र 92,000 लोगों के हाथों में है जो कि विश्व की आबादी का मात्र 0.001% है.

रिपोर्ट कहती है कि इन अतिअमीर लोगों में एक-दूसरे से अधिक समानता दिखाई देती है, जबकि वे अपने ही देशों के लोगों से काफ़ी अलग लगते हैं.