तेजस्वी यादव के 'संजय' जिन्हें राष्ट्रीय जनता दल भेज रहा है राज्यसभा

इमेज स्रोत, RJD/FB
- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ने राज्यसभा चुनाव में सांसद मनोज झा और संजय यादव को उम्मीदवार बनाया है.
मनोज झा को लेकर जहां मीडिया और राजनीतिक हलकों में पहले से ही चर्चा थी तो वहीं संजय यादव की उम्मीदवारी ने बहुतों को चौंकाया है.
ऐसा इसलिए भी क्योंकि संजय यादव अब तक परदे के पीछे रहकर काम करते रहे हैं. वे आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ साए की तरह नज़र आते हैं.
कोई उन्हें तेजस्वी यादव के राजनीतिक व निजी सलाहकार के तौर पर जानता है, तो कोई जिगरी यार के रूप में. वो तेजस्वी के साथ देश के भीतर और विदेशों में भी सभी दौरे पर दिखते हैं. चाहे फिर वो कार्यक्रम पारिवारिक हो या राजनीतिक.
ऐसे में राज्यसभा के प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कइयों के जेहन में ये सवाल ज़रूर आया है कि आख़िर 'संजय यादव' हैं कौन, जिन्हें आरजेडी ने देश की ऊपरी सदन में भेजने का फ़ैसला किया और जिनके नामांकन में ख़ुद पार्टी के सुप्रीमो लालू प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल रहे.
संजय की 'तेजस्वी' भूमिका

इमेज स्रोत, CHIRAG BABU
संजय यादव को लेकर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वे हरियाणा के महेंद्रगढ़ ज़िले के नंगल सिरोही गाँव से ताल्लुक़ रखते हैं. बीएससी (कंप्यूटर साइंस) की पढ़ाई कर रखे संजय का साथ उन दिनों से हैं जब तेजस्वी राजनीति की बजाय क्रिकेट के मैदान में पसीना बहा रहे थे.
राजनीतिक हलके में उनका नाम पहली बार तब सुना गया जब 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के दिए गए 'आरक्षण की समीक्षा' वाले बयान को लेकर लालू प्रसाद ने आक्रामक रुख अपनाया. इससे भाजपा को बिहार में करारी शिकस्त मिली.
हालांकि तब प्रशांत किशोर की चर्चा एक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर अधिक हुई.
ऐसा कहा जाता है कि तब संजय ने ही लालू प्रसाद को सबसे पहले अवगत कराया कि मोहन भागवत ने 'आरक्षण की समीक्षा' को लेकर बयान दिया है, और लालू प्रसाद के सामने एमएस गोलवलकर की 'बंच ऑफ़ थॉट्स' भी प्रस्तुत की. इसके बाद आरजेडी का कैंपेन और चुनाव परिणाम तो इतिहास है.
संजय यादव की राज्यसभा उम्मीदवारी पर बिहार की राजनीति को बेहद नज़दीक से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी कहते हैं, "आज तेजस्वी की राजनीति और भाषण पर हर जगह चर्चा हो रही है. रोज़गार को लेकर आरजेडी और तेजस्वी के रुख की चर्चा हो रही. इन सब में संजय यादव की महत्वपूर्ण भूमिका है. वे तेजस्वी के निजी सलाहकार के साथ ही राजनीतिक सलाहकार भी हैं, और इससे तेजस्वी को नुक़सान के बजाय फ़ायदा अधिक हुआ है."
नेपथ्य में रहकर करते हैं काम

इमेज स्रोत, CHIRAG BABU
राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन आरजेडी की ओर से राज्यसभा में संजय यादव की उम्मीदवारी पर कहते हैं, "संजय यादव पब्लिक स्पेस में तो आते नहीं हैं. नेपथ्य में ही रहते हैं, और उनको लेकर तेज़ प्रताप वाला एक कंट्रोवर्सी रहा ही है, लेकिन इसके बावजूद उनकी पकड़ लालू फ़ैमिली पर ठीक-ठाक रही है. बाकी कई चीज़ों के मामले में वो तेजस्वी से अधिक पढ़े-लिखे और समझदार नज़र आते हैं. थ्योरी पर भी उनकी पकड़ दिखती है."
महेंद्र सुमन कहते हैं, "हालाँकि यह राजनीतिक तौर पर बहुत समझदारी भरा फ़ैसला नहीं है. बिहार का माहौल तो बड़ा नाजुक रहा है. जाति आधारित गणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद से भाजपा जैसे दल सामाजिक समीकरण साध रहे तो इसका भी कोई ख़ास राजनीतिक फ़ायदा इनको नहीं होगा. मनोज झा तो तब भी दल के लिहाज़ से तमाम बातें कई फ़ोरमों पर मज़बूती से रखते हैं."
हमारी कोशिश रहेगी कि जो हमारी पार्टी का भरोसा है, जनमानस का भरोसा है, मैं उस पर खरा उतरु. सदन में जनता के मुद्दे को उठाऊंगा. पार्टी, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद करता हू
बिहार विधानसभा में 15 फ़रवरी को आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव की मौजूदगी में मनोज झा और संजय यादव ने नामांकन दाखिल किया.
मीडिया को दी पहली प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा, "हमारी कोशिश रहेगी कि जो हमारी पार्टी पर जनमानस का भरोसा है, उस पर खरा उतरूं. सदन में जनता के मुद्दे को उठाऊंगा. पार्टी, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद करता हूँ."
बीबीसी हिंदी ने जब उनसे राज्यसभा में आरजेडी का प्रत्याशी बनाए जाने के बारे में पूछा तो संजय यादव ने कहा, "ये राष्ट्रीय अध्यक्ष जी और तेजस्वी जी का फ़ैसला है, जिन उम्मीदों और अपेक्षाओं के साथ उन्होंने मुझे ये अवसर दिया है, मैं उसे समर्पण और निष्ठा के साथ पूरा करने की हर संभव कोशिश करूंगा."
तेजस्वी यादव से अपनी शुरुआती मुलाक़ात के बारे में उन्होंने कहा कि वो 2010-11 के आसपास उनसे पहली बार मिले थे.
संजय यादव सीबीआई के जांच के दायरे में भी हैं. इस पर उन्होंने कहा कि लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने उनसे पूछताछ की है.
पार्टी में अपनी भूमिका के बारे में वो कहते हैं, "मैंने पार्टी में आने के बाद संगठन स्तर पर ईबीसी, एससी और एसटी आरक्षण लागू करने पर जोर दिया. डिजिटल प्रजेंस को बढ़ाने पर ध्यान दिया. पहले ये पार्टी मास पार्टी थी, जिसे अब थोड़ा बेहतर तरीके से संगठित करने, इलेक्शन मैनेजमेंट और कैंपेन मैनेजमेंट को सिस्टमबद्ध करने की कोशिश हुई. मैं चुपचाप रहकर काम करना पसंद करता हूं."
संजय यादव को चौधरी चरण सिंह, चौधरी देवीलाल और शरद यादव राजनेता के रूप में पसंद हैं.
आरजेडी को डिजिटल तेवर दिया

इमेज स्रोत, CHIRAG BABU
संजय यादव की राज्यसभा उम्मीदवारी पर आरजेडी के प्रवक्ता डॉक्टर जयंत जिज्ञासु कहते हैं, "तेजस्वी जी की राजनीतिक यात्रा को क़रीब से देखने वाले और विश्वस्त सहयोगी रहे हैं संजय जी. बेहद धीर-गंभीर व्यक्तित्व के धनी हैं. संयत रहते हैं और बिना शोर-शराबे के अपना काम करते हैं."
वो कहते हैं, "उनका मौलिक योगदान यह भी है कि उन्होंने लिमिटेड ह्यूमन रिसोर्स के बावजूद पार्टी का डिजिटल आर्काइव तैयार किया. पुराने ढर्रे पर चलने वाली पार्टी की वेबसाइट और तमाम सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूदगी दर्ज करवाई."
तेजस्वी जी की राजनीतिक यात्रा को बहुत ही क़रीब से देखने वाले और विश्वस्त सहयोगी हैं संजय जी. बेहद धीर-गंभीर व्यक्तित्व के धनी हैं. संयत रहकर बिना शोर-शराबे के अपना काम करते हैं.
डॉ. जयंत जिज्ञासु कहते हैं, "इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच एक संयोजक का काम किया. संजय राजनीतिक तौर पर बेहद सजग और चपल हैं."
उनकी सबसे बड़ी खासियत पर जयंत कहते हैं, "बिहार से न होने के बावजूद बिहार की राजनीतिक बारीकियों को बड़ी जल्दी पकड़ लिया और उसके हिसाब से दल के कैंपेन और बाक़ी चीज़ों का ख़्याल रखा. अंत में यही कहना है कि उनके काम को मान्यता देना नेपथ्य में रहते हुए खामोशी से काम करने वालों के सामने भी एक नज़ीर है. ऐसा किया जाना कार्यकर्ताओं का भी सम्मान है.''
संजय की उम्मीदवारी पर जेडीयू के सवाल

इमेज स्रोत, CHIRAG BABU
संजय यादव की राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने एतराज़ जताया है.
जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार बीबीसी से कहा, "ई तो पीए हैं और राज्यसभा जा रहे हैं. क्या मतलब है भाई? इतने बड़े-बड़े नेता आपके दल में हैं. सिद्दिक़ी साब हैं, शिवानंद तिवारी, श्याम रजक और उदय नारायण चौधरी हैं."
"आप सबको दरकिनार कर रहे हैं. आख़िर बिहार की पॉलिटिक्स से इनका क्या कनेक्शन है?"
"ये सवाल तो उठता ही न रहा है कि ये कई सरकारी बैठकों में मौजूद रहते थे. अब आरजेडी बताए कि इनकी क्या उपयोगिता रही है? ये तो राजनीति का नया कल्चर है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















