भारतीय हॉकी टीम को एशियाड से पहले दम दिखाने का मौका

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    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

चेन्नई के मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम में शुरू हुई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली भारतीय हॉकी टीम सबसे ऊंची रैंकिंग की टीम होने की वजह से भले ही खिताब की दावेदार है पर उसकी राह को आसान भी नहीं माना जा सकता है.

यह असल में 23 सितम्बर से चीन के हांगझू में होने वाले एशियाई खेलों का ड्रेस रिहर्सल है.

इसकी वजह इसमें वे सभी टीमें भाग ले रहीं हैं, जिन्हें एशियाई खेलों में भाग लेना है.

इससे भारत को बाक़ी टीमों की ताक़त का आकलन करने का सही मौका मिलेगा.

इसमें चौथी रैंकिंग वाली भारतीय टीम के बाद सबसे ऊंची रैंकिंग की टीम दक्षिण कोरिया है, जिसकी रैंकिंग नौवीं हैं.

भाग लेने वाली टीमों में सबसे निचली 25वीं रैंकिंग की टीम चीन है.

इस टीम के साथ ही खेलकर भारत को अपना अभियान शुरू करना है. अन्य प्रमुख टीमें जापान, मलेशिया और पाकिस्तान हैं.

जापान की हॉकी टीम

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एशियाई टीमें रखती हैं उलटफेर का माद्दा

आमतौर पर दुनिया की दिग्गज टीमों के प्रदर्शन में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को कम ही मिलता है.

लेकिन एशियाई टीमें कभी शानदार और कभी कमजोर प्रदर्शन करने के लिए जानी जाती हैं.

इसलिए कौन सी टीम कब गुल खिलाएगी कहना मुश्किल होता है.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण पिछले एशियाई खेल हैं. इन खेलों में किसने सोचा था कि जापान की टीम भारत, पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया के रहते चैंपियन बन जाएगी.

हालांकि जापान की मौजूदा रैंकिंग 19वीं है और इसके बाद भारत उसे आसानी से फतह भी करती रही है.

भारतीय टीम के मुख्य कोच क्रेग फुलटोन का कहना है कि एशियाई खेलों से पहले इन मैचों में खेलना बहुत अच्छा है.

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इससे हमें अन्य टीमों की कैसी तैयारियां चल रहीं हैं, यह जानने में आसानी होगी.

साथ ही हमें यह भी पता चल सकेगा कि हमने अपने खिलाड़ियों को जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वह किस तरह से निभा रहे हैं और उसमें कितने पारंगत हुए हैं.

वह कहते हैं कि भारत ने पिछले दिनों स्पेन में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और उसमें भाग लेने से पहले बेंगलुरु में लगे शिविर में अच्छी तैयारी की थी.

भारतीय टीम यदि अपनी पूरी क्षमता से खेलती है तो उसके चैंपियन बनने में शायद ही कोई दिक्कत हो.

वैसे भी उसे घर में अपने चहेते दर्शकों के बीच खेलने का लाभ भी मिलेगा.

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इमेज कैप्शन, दक्षिण कोरिया की टीम ने 2021 में ढाका में हुई एशियन चैंपियनशिप में पहला स्थान हासिल किया था.

भारत दक्षिण कोरिया और पाकिस्तान से खतरा

भारत यदि इस चैंपियनशिप में खिताब जीत लेता है तो उसका अगले माह होने वाले एशियाई खेलों के लिए मनोबल बढ़ जाएगा.

भारत के लिए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना बेहद जरूरी है. इसकी वजह एशियाई खेलों की चैंपियन टीम को अगले साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों का टिकट मिल जाएगा.

भारत यदि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाता है तो उसे क्वॉलिफाइंग दौर से गुजरना पड़ेगा. इसमें एक दिक्कत यह भी है कि यह क्वॉलिफायर मैच पाकिस्तान और स्पेन में खेले जाएंगे और भारत को पाकिस्तान जाना होगा.

दक्षिण कोरिया टीम पिछले कुछ सालों से उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रही है.

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पर पिछले विश्व कप में भारत से बेहतर प्रदर्शन करके आठवें स्थान पर रही थी, जबकि भारतीय टीम नौवें स्थान पर रही थी. दक्षिण कोरिया को तेज हॉकी खेलने के लिए जाना जाता है.

पर भारतीय टीम उनकी गति पर लगाम लगाने का माद्दा रखती है. उनकी गति पर लगाम लगते ही उनका खेल बिखर भी जाता है.

वैसे भी भारतीय टीम ने फुलटोन के कोच बनने के बाद से डिफेंस पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है.

लेकिन इस चैंपियनशिप में टीम में मनप्रीत सिंह का एक बार फिर उनकी पुरानी पोजिशन मिडफील्डर के तौर पर चयन हुआ है.

इससे लगता है कि इस चैंपियनशिप में टीम के खेलने का अलग अंदाज दिख सकता है.

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इमेज कैप्शन, ओडिशा ट्रेन हादसे में मरने वाले लोगों की याद में एक मिनट का मौन रखती भारतीय हॉकी टीम

युवा कार्ति पर रहने वाली हैं सभी निगाहें

भारतीय फारवर्ड लाइन में युवा खिलाड़ी कार्ति सेल्वम ने पिछले दिनों बहुत शानदार प्रदर्शन किया है.

वो एफआईएच प्रो लीग में ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ गोल जमाने में सफल रहे हैं.

वह तमिलनाडु से ही ताल्लुक रखते हैं, इसलिए उन्हें दर्शकों का जबर्दस्त सहयोग मिलने वाला है.

कार्ति के खेल की सबसे बड़ी खूबी तेज गति है और वह सर्किल में पहुंचकर जो चपलता दिखाते हैं, वह विपक्षी डिफेंस को तंग करने में मददगार बनती है.

इस युवा फारवर्ड के लिए अपने घर में अपनी क्षमता का लोहा मनवाने का अच्छा मौका है.

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कार्ति कहते हैं कि जब उन्हें इंडियन कलर्स मिला, तो वो उनकी जिंदगी का सर्वश्रेष्ठ क्षण था पर अब इसे निभाने का समय आ गया है.

भारत और पाकिस्तान को क्रिकेट की ही तरह हॉकी में भी परंपरागत प्रतिद्वंद्वी माना जाता है पर क्रिकेट मैचों की जैसी दीवानगी, अब हॉकी मैचों की नहीं रही है.

यह सही है कि दोनों टीमें अभी भी एक-दूसरे से हारने से बचना चाहती हैं. पर दोनों टीमों के स्तर में फर्क आने की वजह से इस मुकाबले की लोकप्रियता में कमी आई है.

भारत और पाकिस्तान का मुकाबला नौ अगस्त को खेला जाएगा और यह राउंड रोबिन लीग का आखिरी मैच होगा. इसके बाद टॉप चार टीमों के बीच सेमी फाइनल खेले जाएंगे.

पाकिस्तान की टीम युवा खिलाड़ियों वाली है. यह कह सकते हैं कि पाकिस्तान फिर से टीम को तैयार कर रहा है.

पाकिस्तान की हॉकी टीम

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान की टीम एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए वाघा के रास्ते भारत में दाख़िल हुई.

पाकिस्तान से मुक़ाबला

असल में पिछले सालों में टीम के ओलंपिक और विश्व कप जैसे टूर्नामेंटों के लिए क्वॉलिफाई नहीं करने से पाकिस्तान की हॉकी को झटका लगा है.

यहां तक भारत और पाकिस्तान के मुकाबलों की बात है तो भारत बहुत बेहतर स्थिति में है.

पाकिस्तान ने भारत पर आखिरी बार जीत सात साल पहले दक्षिण एशियाई खेलों में हासिल की थी. इस जीत से उसने स्वर्ण पदक जीता था.

इसके बाद से दोनों देशों के बीच खेले गए 15 मुकाबलों में से 12 को भारत ने जीता है और दो ड्रॉ रहे हैं और एक में कोई परिणाम नहीं निकला है.

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह पाकिस्तान के साथ मुकाबले के बारे में कहते हैं कि क्रिकेट हो या हॉकी पाकिस्तान के साथ मुकाबले में रोमांच रहता है. इसमें भावनाएं ऊंची उड़ान भरने लगती हैं.

पर वह कहते हैं कि हमारे लिए यह एक मैच से ज्यादा और कुछ नहीं होता है.

वीडियो कैप्शन, टोक्यो में भारतीय हॉकी टीम की जीत पर पाकिस्तान में चर्चा

पाकिस्तान के अलावा मलेशिया भी ऐसी टीम है, जो भारत को अक्सर परेशान करने में सफल रही है.

करीब दशक पहले टैरी वाल्श के कोच रहते तो मलेशिया हॉकी में एक ताकत के रूप में सामने आई थी. पर अब वह वैसी दमदार टीम नहीं रही है और वह अब दसवीं रैंकिंग की टीम है.

भारत और पाकिस्तान का इस चैंपियनशिप में दबदबा रहा है.

दोनों टीमों को तीन-तीन बार विजेता बनने का गौरव हासिल है. इन दोनों के अलावा सिर्फ एक बार दक्षिण कोरिया को चैंपियन बनने का गौरव हासिल है.

भारत जब 2021 में इस चैंपियनशिप में भाग लेने गया था, तब भी सभी टीमों में सबसे ऊंची रैंकिंग वाला था. लेकिन उस समय वह कांस्य पदक ही जीत सका था.

इस बार उसे घरेलू दर्शकों का समर्थन मिलेगा पर उनकी उम्मीदों का बोझ भी रहेगा. पर इन अम्मीदों पर कितना खरा उतरता है, यह देखने वाली बात होगी.

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