भारत ने जीता पहला नेशंस कप, स्पेन को उसकी मांद में दी मात

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने पहला नेशंस कप जीतकर एफ़आईएच प्रो लीग में खेलने का अधिकार हासिल कर लिया है.
भारत ने स्पेन को 1-0 से हराया और अब वो 2023-24 के प्रो लीग में खेलेगा. भारत की इस जीत की हीरोइन निश्चय ही डीप डिफेंडर दीप ग्रेस एक्का रहीं.
भारत ने पहले ही पेनल्टी कॉर्नर पर पांचवें मिनट में गोल जमाकर बढ़त बना ली. यह गोल गुरजीत कौर ने जमाया.
भारत अपनी इस बढ़त को आख़िर तक बनाए रखने में सफल रहा. इसमें डिफेंडर दीप ग्रेस एक्का के सूझ-बूझ भरे डिफेंस ने अहम भूमिका निभाई.
स्पेन ने आख़िरी क्वार्टर में बराबरी का गोल जमाने के लिए हमलों को झड़ी लगा दी. कई बार हमले ख़तरनाक बनते भी नज़र आए. लेकिन भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया की अगुआई वाला डिफेंस उन्हें गोल जमाने से रोके रखने में सफल रहा.
तीसरे क्वार्टर में एक मौक़ा ऐसा आया जब लगा कि भारतीय टीम का सपना टूट सकता है.
खेल के 41वें मिनट में स्पेन दाहिने फ्लैंक से हमला कर गोल कर बराबरी पाने में सफल हो गया लेकिन भारत के रिव्यू लेने पर ये साफ़ हो गया कि गोल ज़माने से पहले ही फ़ाउल हो गया था और यह गोल नकार दिया गया.

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कमज़ोरी बनी ताक़त
स्पेन के ख़िलाफ़ फ़ाइनल से पहले तक भारतीय डिफ़ेंस के बारे में माना जा रहा था कि यह कई बार दवाब में बिखर जाता है.
लेकिन फ़ाइनल में भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह डटा रहा. स्पेन के हमलों के समय भारतीय डिफेंडर उन्हें गोल पर निशाना साधने से रोक रहे थे.
यही नहीं भारतीय डिफेंस ने सर्किल में गेंद को क्लियर करने में भी सफ़ाई दिखाई, जिसकी वजह से स्पेन को बहुत पेनल्टी कॉर्नर नहीं मिल सके.
फ़ाइनल से पहले कहा जा रहा था कि फ़ॉरवर्ड लाइन और मिडफ़ील्ड में सलीमा टेटे, सोनिका, नवनीत कौर, नवजोत कौर, वंदना कटारिया और ब्यूटी डुंगडुंग के अच्छे प्रदर्शन की वजह से टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है.
पर कोच जानके शोपमैन टीम के डिफेंस में बहुत सुधार नहीं कर सकी हैं. कई बार विपक्षी टीम के ताबड़तोड़ हमले बनाने पर डिफेंस दवाब में चरमराता नज़र आता है.
भारतीय टीम को इस पर काफ़ी काम करने की ज़रूरत है. लेकिन फ़ाइनल में इस डिफेंस ने जो एकजुटता दिखाई, उसकी जितनी भी तारीफ़ की जाए, वह कम है.
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पेनल्टी कॉर्नर पर गोल ने जिताया पर सुधार की ज़रूरत
भारत के सिर जीत का सेहरा बांधने में पहले पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रेग फ्लिकर गुरजीत कौर द्वारा जमाए गोल ने अहम भूमिका निभाई.
गुरजीत के पहले मौक़े को ही गोल में बदल देने पर लग रहा था कि भारत मैच में आगे इस क्षेत्र में अब सुधरा प्रदर्शन करेगा. पर कहानी वही ढाक के तीन पात वाली रही.
भारत बाद में मिले पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में नहीं बदल सका. उसकी यह कमज़ोरी पहले मैचों में भी साफ़ नज़र आई.
मौजूदा दौर में पेनल्टी कॉर्नरों का बेहद महत्व है. हमारे फ़ॉरवर्ड पेनल्टी कॉनरों को पाने में तो सफल हो जाते हैं. पर हमारे पास इन पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदल पाने वाले खिलाड़ियों की कमी साफ़ दिखती है.
आयरलैंड के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में भारत को 11 पेनल्टी कॉर्नर मिले पर इनमें से सिर्फ एक को ही गोल में बदला जा सका. यही स्थिति ग्रुप मैचों में भी रही. लेकिन उन मैचों में यह कमी ज़्यादा खली नहीं. पर यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सुधार की ज़रूरत है.

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एफ़आईएच प्रो लीग में खेलने का फ़ायदा
असल में इस नेशंस कप का आयोजन एफ़आईएच प्रो लीग के प्रमोशन और रेलीगेशन टूर्नामेंट के तौर पर आयोजन किया गया है.
प्रो लीग में आख़िरी स्थान पर रहने वाली टीम को बाहर का रास्ता दिखाने और नेशंस कप की विजेता को प्रो लीग में पदोन्नति देने की व्यवस्था है. इस टूर्नामेंट के माध्यम से एफ़आईएच प्रो लीग में स्थान बनाने वाला भारत पहला देश है.
इस बार नेशंस कप में विजेता बनने का महत्व इसलिए ज़्यादा है. क्योंकि इसका विजेता 2023-24 की एफ़आईएच प्रो लीग में खेलेगा.
साल 2023 में 19वें एशियाई खेलों का चीन में 23 सितम्बर से आठ अक्टूबर तक और साल 2024 में 26 जुलाई से 11 अगस्त तक पेरिस ओलंपिक का आयोजन होना है. इसलिए प्रो लीग में दिग्गज टीमों के साथ खेलने का मौक़ा मिलने से बेहतर तैयारी की जा सकेगी.
भारतीय टीम 2021-22 के एफ़आईएच प्रो लीग में भाग ले चुकी है. पर इसमें उसे भाग लेने का मौक़ा कुछ टीमों के कोविड के कारण भाग नहीं लेने से मिला था. हालांकि भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करके तीसरा स्थान हासिल करके अपनी क्षमता दिखा दी थी.
लेकिन इस प्रो लीग में रैंकिंग की पहली छह टीमों को ही डायरेक्ट भाग लेने की पात्रता मिलती है और भारतीय टीम की रैंकिंग आठवीं है और इस कारण ही वह नेशंस कप में खेला है. अब उसे अगले साल फिर से अपनी क्षमता को दिखाने का मौक़ा मिला है.

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सविता ने फिर किया कमाल का प्रदर्शन
भारतीय गोलकीपर सविता पूनिया ने अपने शानदार बचाव से पहले भी कई बार टीम की नैया पार लगाई है. फ़ाइनल में भी वह गोल पर चट्टान की तरह डटीं रहीं. उन्होंने कुछ नहीं तो कम से कम चार मौक़ों पर बेहतरीन बचाव करके भारतीय बढ़त को बनाए रखा.
इससे पहले सेमीफ़ाइनल में आयरलैंड पर जीत में भी उनकी भूमिका अहम रही. निर्धारित समय में एक-एक की बराबरी रहने के बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट में खिंचने पर सविता के बचाव का कमाल एक बार फिर देखने को मिला.
भारत के लिए लालरेमसेमी और सोनिका ने गोल जमा दिए. वहीं सविता ने आयरलैंड की हन्नाह मैकलॉघिन की स्ट्राइक को रोक दिया.
इस स्थिति में आयरलैंड की कैथरीन मुल्लान पर सारा दारोमदार था. लेकिन वह सविता द्वारा बनाए दवाब में अपना शॉट बाहर मार गई.
इससे पहले भारत ने ग्रुप बी में चिली, जापान और दक्षिण अफ्रीका को फतह करके अपनी स्लेट क्लीन रखते हुए सेमीफ़ाइनल में स्थान बनाया था.
इस ग्रुप में जापान दूसरे स्थान पर रहकर सेमीफ़ाइनल में पहुंचा और उसे ख़िताबी दौड़ के मुक़ाबले में पहुंचने के मुक़ाबले में स्पेन के हाथों 1-0 से हार का सामना करना पड़ा.
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भारतीय टीम करती रही है प्रभावित
भारतीय महिला हॉकी टीम पिछले कुछ समय से शानदार प्रदर्शन करती रही. अब इस श्रृंखला में नेशंस कप की यह जीत भी शामिल हो गई है.
भारतीय टीम भले ही टोक्यो ओलंपिक में पोडियम पर चढ़ने से वंचित हो गई थी, पर कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर अपने प्रदर्शन का लोहा मनवा दिया था.
कांस्य पदक के मुक़ाबले में न्यूजीलैंड से निर्धारित समय में एक-एक की बराबरी रहने पर पेनल्टी शूटआउट में गोलकीपर सविता के शानदार बचाव से भारत ने 2-1 से जीत पाकर पदक पर कब्ज़ा जमाया था.
यह अलग बात है कि यह मुक़ाबला भारतीय डिफेंस की गलती की वजह से ही शूटआउट तक खिंचा था.
भारतीय टीम खेल समाप्ति से एक मिनट पहले तक 1-0 की बढ़त बनाए हुई थी. लेकिन डिफेंस की गलत टैकलिंग की वजह से आख़िरी समय में मिले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर न्यूजीलैंड फिर से मुक़ाबले में आ गया था.
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