चार देशों के हॉकी टूर्नामेंट में दिखेगा कितना बदला है भारतीय हॉकी का अंदाज़

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय हॉकी टीम को क्रेग फुलटोन के रूप में नया कोच मिलने से वह अब एक नए अंदाज़ में खेलती नजर आएगी.
टीम का यह नया अंदाज़ स्पेन हॉकी फेडरेशन की शताब्दी पर आयोजित चार देशों के अंतरराष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट में देखने को मिलेगा.
हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली भारतीय टीम 25 जुलाई को मेजबान स्पेन से खेलकर अपना अभियान शुरू करेगी.
भारतीय टीम को इसके बाद 26 जुलाई को नीदरलैंड से और 28 जुलाई को इंग्लैंड से खेलना है.
टॉप दो स्थानों पर रहने वाली टीमों के बीच 30 जुलाई को फ़ाइनल खेला जाएगा.
टीम के खेलने का क्या है नया अंदाज़

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भारतीय हॉकी टीम को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जिताने वाले कोच ग्राहम रीड के समय तक टीम का ज़ोर पूरी तरह से आक्रमण पर हुआ करता था.
लेकिन फुलटोन ने खेलने के अंदाज़ को नया आयाम दिया है.
फुलटोन लंबे समय तक बेल्ज़ियम टीम से जुड़े रहे हैं, इसलिए उनका अंदाज़ ग्राहम रीड से भिन्न है.
फुलटोन ने पिछले दिनों बेंगलुरू में लगे शिविर में टीम के डिफेंस को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया है.
वह चाहते हैं कि भारतीय टीम बेहतरीन डिफ़ेंस करके मुक़ाबले जीते.
असल में यह सोच यूरोपीय टीमों वाली है. वह हमेशा पहले अपने डिफेंस पर ध्यान देती हैं और फिर एकाएक हमले बोलकर सामने वाली टीम के डिफेंस में दरार बनाने का प्रयास करती हैं.
इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम इसी अंदाज़ में खेलती नजर आएगी.
स्पेन, नीदरलैंड और इंग्लैंड तीनों ही टीमें विश्व की दिग्गज टीमों में शुमार रखती हैं, इसलिए इन टीमों के ख़िलाफ़ कोई भी योजना अपनाना किसी हद तक अच्छा भी है.
इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन से यह अंदाज़ भी लग जाएगा कि हमारी टीम इस नए अंदाज़ में कितनी पारंगत हो पाई है.
यह सही है कि डिफेंस में दरारें बनने की वजह से भारतीय टीम कुछ ऐसे मैच हारी है, जिसमें वह जीत की स्थिति में थी.
फुलटोन के खेलने का यह नया अंदाज़ कितना कारगर रहता है, यह भी इस टूर्नामेंट में देखने को मिलने वाला है.
मनप्रीत सिंह ने दी है डिफेंस को मजबूती

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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह को सालों से मिडफ़ील्ड में खेलकर हमलों का संचालन करते देखा गया है.
पर नए कोच उन्हें डिफेंस को मजबूती प्रदान करने के लिए डिफेंस में ले गए हैं और इसकी वजह उनका मुश्किल समय में भी दिमाग़ को ठंडा रखना है.
पिछले दिनों भारतीय टीम एफआईएच प्रो लीग के मैच खेलने यूरोपीय दौरे पर गई थी, उस समय मनप्रीत की पोजिशन में बदलाव किया गया था, शुरुआत में जरूर लगा कि वह अपनी नई पोजिशन में बहुत प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं.
पर जल्द ही वह अपनी इस नई भूमिका में रम गए.
मनप्रीत का इस संबंध में कहना है कि उन्होंने करियर की शुरुआत डिफेंडर के तौर पर की थी और बाद में मिडफील्ड में खेलने लगा था. अब अपनी पुरानी पोजिशन पर लौट आया हूं.
इस बदलाव का परिणाम साफ़ दिखने को मिला.
पहले जो टीमें बिना रोक-टोक के भारतीय खतरा क्षेत्र में मंडराती रहती थीं, उन्हें भारतीय डिफेंडर मनप्रीत की अगुआई में सर्किल के बाहर ही टैकल कर रहे थे.
इसका एक प्रमुख फायदा यह हुआ कि भारतीय टीम के ख़िलाफ़ मिलने वाले पेनल्टी कॉर्नरों की संख्या में भी काफी कमी आ गई.
गोलकीपरों के कैंप से होगा फ़ायदा

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क्रेग फुलटोन यह बात अच्छे से जानते हैं कि किसी भी टीम की सफलता में गोलकीपरों के प्रदर्शन की भूमिका अहम होती है.
इसे ध्यान में रखकर उन्होंने बेंगलुरू साई सेंटर में 13 से 19 जुलाई तक डेनिस वान पोल की देख रेख में गोलकीपिंग कैंप लगाया.
डेनिस दुनिया के प्रमुख गोलकीपिंग कोचों में शुमार रखते हैं.
भारत के नंबर वन गोलकीपर श्रीजेश कहते हैं कि डेनिस के साथ काम करना बेहतरीन रहा.
उन्होंने इस शिविर में उनके और कृष्ण बहादुर पाठक के अलावा तमाम युवा गोलकीपरों को तमाम बारीकियां सिखाई.
इस शिविर में उन्होंने खासतौर से पेनल्टी कॉर्नरों को रोकने, पेनल्टी शूटआउट में कैसे बचाव करें, यह तो सिखाया ही, साथ ही उन्होंने गोलकीपरों के फुटवर्क पर विशेष काम किया.
श्रीजेश ने कहा कि इस कैंप में जो सीखा है, उसे स्पेन में चार देशों के टूर्नामेंट में इस्तेमाल करने का प्रयास करेंगे.
यह ठीक ही है कि किसी भी टीम की तैयारियां का सही जायजा टूर्नामेंट में खेलने पर ही मिलता है.
फुलटोन के लिए भी है महत्वपूर्ण

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क्रेग फुलटोन के कोच की ज़िम्मेदारी संभालने के तीन हफ्ते बाद ही भारतीय टीम प्रो लीग के मैच खेलने गई थी.
पर उस समय माना गया था कि उन्हें टीम से घुलने-मिलने का समय नहीं मिला है.
हालांकि उस समय भी भारत ने चार मैच जीतकर और चार हारकर ठीक-ठाक ही प्रदर्शन किया था.
पर उस समय टीम पर उनकी छाप नहीं पड़ सकी थी, ऐसा माना गया था पर अब टीम पूरी तरह से उनके अंदाज़ से खेलने जा रही है.
फुलटोन ने टीम के स्पेन रवानगी पर कहा कि इस टूर्नामेंट में हम अपनी योजनाओं और स्ट्रक्चरों को आजमाने का प्रयास करेंगे.
इससे इस बात का संकेत जरूर मिलेगा कि टीम किस दिशा में जा रही है.
उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट में हमारा फोकस अपनी स्ट्रेंथ पर खेलने पर रहेगा और मुझे सकारात्मक परिणामों की उम्मीद है.
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह का मानना है कि हम मजबूत टीमों के ख़िलाफ़ खेलकर अपनी क्षमताओं का सही आंकलन कर सकेंगे. उन्हें भी इस टूर्नामेंट में अच्छे प्रदर्शन का भरोसा है.
इस टूर्नामेंट के भारत के लिए क्या हैं मायने

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इस साल अगस्त में चेन्नई में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का और सितम्बर माह में चीन के हांगझू में एशियाई खेलों का आयोजन होना है और दोनों ही टूर्नामेंट भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.
दोनों ही टूर्नामेंटों में लगभग समान टीमों को भाग लेना है.
एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का घर में आयोजन होने से भारत को यह बता चल सकेगा कि दक्षिण कोरिया, मलयेशिया, पाकिस्तान और जापान की तैयारियां कैसी हैं.
यहां टीमों की क्षमता का सही आकलन एशियाई खेलों में काम आएगा.
एशियाई खेलों में भले ही भारतीय टीम सर्वोच्च रैंकिंग वाली टीम होगी पर उसे उपरोक्त चारों टीमों से खतरा हमेशा बना रहेगा.
भारत के लिए एशियाई खेलों में चैंपियन बनना, इसलिए जरूरी है, क्योंकि ऐसा करके वह अगले साल होने वाले पेरिस ओलंपिक का टिकट कटा सकता है.
ऐसा नहीं कर पाने पाने पर क्वालिफायर दौर से गुजरना पड़ सकता है.
इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली दो टीमें नीदरलैंड और इंग्लैंड भारत से रैंकिंग में ऊपर हैं.
सिर्फ़ स्पेन ही भारत से तीन रैंकिंग पीछे यानी सातवें नंबर पर है. वैसे भी एफ़आईएच प्रो लीग की पिछली साइकिल में भारत ने इंग्लैंड को तो एक बार फ़तह भी कर लिया था पर नीदरलैंड से दोनों मैच हार गई थी.
इसलिए इसमें जीतने के लिए भारत को अपना सारा अनुभव उड़लने की जरूरत होगी. इसलिए इसमें खेलकर एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और एशियाई खेलों की तैयारी भी अच्छी होगी.












